ज्योतिष डेस्क | अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा के साथ एक अनोखी परंपरा भी सदियों से निभाई जा रही है. पूजा के दौरान अनंत भगवान को खीरे में बांधकर पंचामृत में रखा जाता है और फिर श्रद्धालु उन्हें खोजते हैं. धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा का संबंध समुद्र मंथन से बताया गया है. इस साल अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी. पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और चीनी से तैयार किया जाता है.
मान्यता है कि इसमें अनंत भगवान को खोजने की परंपरा समुद्र मंथन की घटना का प्रतीक है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन से अमृत और विष समेत कई चीजें निकली थीं. इसी दौरान निकले विष को भगवान शिव ने धारण किया था, जिसके कारण उन्हें नीलकंठ कहा गया.
25 सितंबर को रखा जाएगा व्रत
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी. इसका समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 06 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार अनंत चतुर्दशी का व्रत 25 सितंबर को रखा जाएगा. अनंत चतुर्दशी पूजन का समय सुबह 6 बजकर 28 मिनट से रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 36 मिनट से 5 बजकर 24 मिनट और रवि योग सुबह 6 बजकर 12 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.
अनंत सूत्र पहनने की परंपरा
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित मानी जाती है. इस दिन रेशम, कुशा या सूती धागे में 14 गांठें लगाकर अनंत सूत्र पहनने की परंपरा है. इन गांठों को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप, स्थिरता और संपन्नता से जोड़कर देखा जाता है. इसी दिन 10 दिवसीय गणेशोत्सव भी समाप्त होता है. पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालु गणपति बप्पा की प्रतिमाओं का विधिपूर्वक विसर्जन करते हैं.
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