ज्योतिष डेस्क | नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है. नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के अलग- अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति जलाने की भी परंपरा है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के पहले दिन जलाई गई अखंड ज्योति को देवी दुर्गा की शक्ति का प्रतीक माना जाता है. अगर आप भी इस बार घर में अखंड ज्योति जलाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों को जानना जरूरी है.
अखंड का अर्थ ऐसी ज्योति से है, जो लगातार जलती रहे. धार्मिक मान्यताओं में इसे सकारात्मक ऊर्जा, शुभता और देवी की उपस्थिति से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने और श्रद्धापूर्वक पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है.
अखंड ज्योति होती है खास
दीप प्रज्वलित करते समय धार्मिक परंपराओं में दीप ज्योति मंत्र पढ़ने का भी विधान बताया गया है. इसका भाव जीवन में शुभता, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के साथ मन के नकारात्मक विचारों और अज्ञान को दूर करने की प्रार्थना से जुड़ा है. धार्मिक परंपराओं के अनुसार, अखंड ज्योति के लिए शुद्ध देसी घी या तिल के तेल का इस्तेमाल शुभ माना जाता है. दीपक जलाने से पहले संकल्प लेने की परंपरा भी है कि ज्योति को पूरे नौ दिनों तक जलाए रखा जाएगा.
इसके बाद दीपक में पर्याप्त घी या तेल बनाए रखना जरूरी होता है, ताकि ज्योति बुझने की स्थिति न बने. दीपक ऐसी जगह रखने की सलाह दी जाती है, जहां उस पर सीधे हवा न लगे. लौ को हवा से बचाने के लिए कांच के कवर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
परंपरागत मान्यताओं में अखंड ज्योति का बीच में बुझना शुभ नहीं माना जाता है. इसी वजह से नौ दिनों तक दीपक की नियमित देखभाल करने की परंपरा है. एक अन्य मान्यता के अनुसार, घर में अखंड ज्योति जलाने के बाद मकान को पूरी तरह खाली नहीं छोड़ना चाहिए. परिवार का कोई सदस्य घर में मौजूद रहे, ताकि दीपक की देखभाल की जा सके. धार्मिक मान्यताओं में नौ दिनों तक श्रद्धा के साथ अखंड ज्योति जलाने को परिवार की सुख- समृद्धि और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है.
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