नई दिल्ली | खेती में अच्छी पैदावार के लिए किसानों को समय पर बीज, खाद, पानी और पैसों की जरूरत पड़ती है लेकिन देश के कई इलाकों में किसानों को ये सुविधाएं आसानी से नहीं मिल पातीं। इसका सीधा असर फसलों की पैदावार और कमाई पर पड़ता है। अब केंद्र सरकार ऐसे जिलों में खेती की स्थिति सुधारने और किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देश के 100 कृषि क्षेत्र में पिछड़े जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इन जिलों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए कलेक्टर हर महीने जिला कृषि कार्ययोजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे। खासतौर पर उन क्षेत्रों में काम तेज किया जाएगा, जहां फसलों की पैदावार, फसल सघनता और कृषि ऋण की उपलब्धता कम है।
समय पर कर्ज
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें 50 से अधिक जिलाधिकारियों के साथ वैज्ञानिक और नीति-निर्माता शामिल हुए। इस दौरान किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़ाने और कृषि ऋण की उपलब्धता बेहतर करने पर जोर दिया गया। इससे किसानों को बीज, खाद और आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए समय पर पूंजी मिल सकेगी।
वहीं, धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में दलहन और तिलहन की खेती बढ़ाने की रणनीति भी बनाई गई है। इससे किसान एक ही खेत में अधिक फसलें उगा सकेंगे और अतिरिक्त कमाई के अवसर मिलेंगे।
काम की हुई सराहना
सम्मेलन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया। बिहार के बांका जिले में प्राकृतिक खेती और भूमि सुधार के प्रयासों को उदाहरण के तौर पर पेश किया गया। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, छत्तीसगढ़ के कोरबा और पंजाब के फाजिल्का में किए गए कृषि नवाचारों की भी सराहना हुई। इसी बीच योजना में सिंचाई, जल संरक्षण, कृषि प्रसंस्करण, सहकारिता, किसान उत्पादक संगठन, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन को भी शामिल करने पर जोर दिया गया है।