ज्योतिष डेस्क | परिवर्तिनी एकादशी की तारीख को लेकर अगर 21 और 22 सितंबर के बीच कन्फ्यूजन है तो पंचांग के अनुसार व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष में आने वाली इस एकादशी को हिंदू धर्म में विशेष माना गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु योग निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है.
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि को देखते हुए परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा.
कब शुरू होगी एकादशी तिथि
पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट और विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 32 मिनट से 3 बजकर 21 मिनट तक रहेगा. शाम को गोधूलि मुहूर्त 6 बजकर 35 मिनट से 6 बजकर 59 मिनट तक है.
ऐसे करें पूजा
सुबह स्नान के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें. संभव हो तो पीले वस्त्र पहन सकते हैं. पूजा की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर रखें. भगवान विष्णु को चंदन, पीले फूल, पंचामृत, तुलसीदल, फल और नैवेद्य अर्पित करें. माता लक्ष्मी को श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं. घी का दीया जलाकर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ने या सुनने के बाद आरती करें.
23 सितंबर को होगा पारण
व्रत का पारण 23 सितंबर को सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट के बीच किया जा सकेगा. इस दिन द्वादशी तिथि रात 10 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी व्रत का पारण द्वादशी समाप्त होने से पहले किया जाता है.
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