ज्योतिष डेस्क | शास्त्र में केतु के राशि और नक्षत्र परिवर्तन को महत्वपूर्ण माना जाता है. ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 25 नवंबर 2026 को दोपहर 4 बजकर 34 मिनट पर केतु आश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे. इस नक्षत्र के स्वामी बुध माने जाते हैं, जिन्हें बुद्धि और संचार से जोड़कर देखा जाता है.
मान्यताओं के अनुसार, केतु के इस परिवर्तन के दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार, आर्थिक फैसलों और दूसरों के साथ संबंधों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. आइए जानते हैं कि इस अवधि में किन कामों से बचने और कौन-से उपाय करने की परंपरा है.
इन कामों से बचने की मान्यता
ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, इस अवधि में बिना सोच-विचार किए लॉटरी या नए कारोबार में पैसा लगाने से बचना चाहिए. ऐसा माना जाता है कि जल्दबाजी में लिए गए आर्थिक फैसले नुकसान का कारण बन सकते हैं. हालांकि, किसी भी निवेश का वास्तविक जोखिम बाजार और व्यक्तिगत आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
केतु को ज्योतिष में कुत्ते से भी जोड़ा जाता है. इसलिए इस दौरान कुत्तों सहित किसी भी बेजुबान जानवर को परेशान करने या भूखा रखने से बचने की सलाह दी जाती है.
साधु-संतों और पुजारियों का अपमान करना भी धार्मिक मान्यताओं में अनुचित माना गया है. ज्योतिष के अनुसार, ऐसे व्यवहार को केतु के प्रतिकूल प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है. केतु के नक्षत्र परिवर्तन के दौरान किसी को धोखा देने, झूठ बोलने और बिना वजह बहस करने से बचने की सलाह दी जाती है. पारंपरिक मान्यता है कि इस तरह के व्यवहार से जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं.
करें ये उपाय
ज्योतिषीय परंपराओं में बेसहारा कुत्तों की सेवा करना शुभ माना जाता है. जरूरत के अनुसार उन्हें उपयुक्त भोजन और स्वच्छ पानी दिया जा सकता है. भगवान गणेश की नियमित पूजा करने, गणेश चालीसा और गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करने की परंपरा है. श्रद्धालु ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप भी कर सकते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन उपायों को केतु की अनुकूलता और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है.
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