नई दिल्ली, DDA Scheme | राजाधानी दिल्ली जैसे बड़े शहर में अपना पक्का घर होना हर किसी का सपना होता है, लेकिन झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए यह आज भी आसान नहीं है. अब ऐसे परिवारों को उनके रहने की जगह के आसपास ही पक्का घर देने की दिशा में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने एक बड़ी योजना पर काम शुरू किया है. जी हां, तो खुश हो जाईए ये खबर उन सभी के लिए है जो लंबे अर्से से अपने घर का इंताजर कर रहे हैं…
बता दें कि इस योजना से दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले करीब 17 लाख लोगों को जोड़ने की तैयारी है. सबसे खास बात यह है कि लोगों को घर देने के लिए उनके मौजूदा इलाके से दूर भेजने के बजाय वहीं आवास तैयार करने की योजना है.
इन-सिटू मॉडल पर काम
DDA इसके लिए ‘इन-सिटू’ मॉडल पर काम कर रहा है. आसान भाषा में समझें तो इसके तहत झुग्गी में रहने वाले लोगों के लिए उसी इलाके में स्थायी आवास तैयार किए जाएंगे. योजना में रहने वाले परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का भी ध्यान रखने की बात कही गई है. DDA की योजना के मुताबिक, फ्लैट्स के आसपास स्कूल, आंगनवाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी. इसके साथ ही आने-जाने के लिए सड़कों की व्यवस्था पर भी काम किया जाएगा.
स्थानीय निकायों की भूमिका
फिलहाल, DDA इस योजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है. जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण से जुड़ा काम आगे बढ़ाया जा सकेगा. इस पूरे प्रोजेक्ट में दूसरे सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों की भूमिका भी रहेगी.
‘जहां झुग्गी वहीं मकान’ योजना की मुख्य बातें
- योजना का नाम: इन-सिटू (In-Situ) स्लम पुनर्वास योजना (‘जहां झुग्गी वहीं मकान’)
- किन इलाकों में काम: कालकाजी एक्सटेंशन, जेलरवाला बाग और कठपुतली कॉलोनी जैसे कई प्रोजेक्ट्स पर चरणबद्ध तरीके से काम चल रहा है.
- आधुनिक सुविधाएं: बहुमंजिला इमारतों में पक्के फ्लैट्स, लिफ्ट, कम्युनिटी सेंटर, पार्क, सीवरेज और चौड़ी सड़कें शामिल हैं.
- पात्रता के लिए जरूरी दस्तावेज: दिल्ली का राशन कार्ड, वोटर आईडी, आधार कार्ड और परिवार का सर्वे रिकॉर्ड.
किसे और कैसे मिलेगा पक्के फ्लैट का लाभ?
DDA के नियमों के अनुसार, इस योजना का लाभ केवल उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनका नाम पात्रता सर्वे सूची में दर्ज है और जो निर्धारित कट-ऑफ तारीख से पहले से उस झुग्गी बस्ती में रह रहे हैं. फ्लैट आवंटन से पहले बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच की जाती है, ताकि वास्तविक पात्र परिवारों को ही मालिकाना हक मिल सके.
