नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली की सड़कों पर रात के समय रोशनी की व्यवस्था को बेहतर करने के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू होने वाला है। लोक निर्माण विभाग (PWD) 11 अक्टूबर से पुरानी स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट लाइटों से बदलना शुरू करेगा। इस परियोजना पर करीब 473 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत जनवरी 2027 तक करीब एक लाख पुरानी स्ट्रीट लाइटों को स्मार्ट लाइटों से बदलने का लक्ष्य रखा गया है। जून में वित्त व्यय समिति इस परियोजना को मंजूरी दे चुकी है।
PWD ने काम को चरणबद्ध तरीके से पूरा करने की योजना बनाई है। पहले चरण में दीपावली तक करीब 20 हजार पुरानी स्ट्रीट लाइटों को बदला जाएगा। इसके बाद काम जारी रखते हुए जनवरी 2027 तक यह संख्या एक लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
दीपावली तक बदलेंगी 20 हजार स्ट्रीट लाइट
PWD मंत्री प्रवेश वर्मा के अनुसार, नई व्यवस्था में तकनीक की मदद से स्ट्रीट लाइटों की निगरानी और रखरखाव किया जाएगा। इससे किसी लाइट में खराबी आने पर विभाग को उसकी जानकारी जल्द मिल सकेगी और समस्या को दूर करने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी। स्मार्ट स्ट्रीट लाइट परियोजना के लिए PWD मुख्यालय में केंद्रीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाया जाएगा। इसे पांच अक्टूबर तक स्थापित करने की योजना है। इस सेंटर के जरिए स्ट्रीट लाइटों की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
किसी लाइट के खराब होने पर सिस्टम के जरिए उसकी पहचान हो सकेगी। जरूरत पड़ने पर लाइट को दूर से नियंत्रित करने की सुविधा भी होगी। सरकार का मानना है कि बेहतर रोशनी की व्यवस्था सड़क और महिला सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
सालाना 30 करोड़ रुपये बचने का अनुमान
अधिकारियों के मुताबिक, पुरानी सोडियम लाइटों की जगह ऊर्जा-दक्ष स्मार्ट LED लाइटें लगाई जाएंगी। इससे बिजली की खपत और रखरखाव खर्च कम होने की उम्मीद है। सरकार को इससे हर साल करीब 30 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है। पूरी परियोजना की अनुमानित लागत 473 करोड़ रुपये है। इसमें पांच साल तक संचालन और रखरखाव का खर्च भी शामिल है। स्मार्ट लाइट लगाने वाली निजी कंपनी को मासिक भुगतान लाइटों के चालू और सही तरीके से काम करने की स्थिति के आधार पर किया जाएगा।
