नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली के बाहरी और पश्चिमी इलाकों में नए उद्योग स्थापित करने की वर्षों पुरानी योजना को आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है. सरकार ने कंझावला, रानीखेड़ा और बापरोला में करीब 1148 एकड़ भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिह्नित की है. प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति में ऐसे उद्योगों पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे प्रदूषण अपेक्षाकृत कम हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हों.
नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले सरकार ने उद्योग जगत और भवन निर्माण क्षेत्र के प्रतिनिधियों से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू की है. तीनों क्षेत्रों के विकास की योजना आगे बढ़ाई जा रही है, इन्हें पूरी तरह विकसित औद्योगिक हब नहीं माना जा सकता.
इतनी जमीन होगी विकसित
तीनों प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में कंझावला सबसे बड़ा है. यहां करीब 920 एकड़ भूमि चिह्नित की गई है. रानीखेड़ा में 147 एकड़ और बापरोला में 81 एकड़ भूमि पर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार प्रस्तावित है. कंझावला, रानीखेड़ा और बापरोला को औद्योगिक क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव नया नहीं है. पहले भी यहां उद्योग स्थापित करने की योजनाएं बनाई गई थीं, लेकिन भूमि, नियोजन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी अड़चनों के कारण काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया.
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प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र |
चिह्नित भूमि |
|---|---|
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कंझावला |
920 एकड़ |
| रानीखेड़ा |
147 एकड़ |
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बापरोला |
81 एकड़ |
| कुल |
1148 एकड़ |
बापरोला में पहले इलेक्ट्रॉनिक सिटी विकसित करने की चर्चा भी होती रही है. अब प्रस्तावित औद्योगिक नीति के जरिए इन योजनाओं को आगे बढ़ाने की उम्मीद है.
अटकी हुई थी योजना
प्रस्तावित नई औद्योगिक नीति 2026-2036 में स्वच्छ, तकनीक आधारित और ज्ञान-केंद्रित उद्योगों को बढ़ावा देने की तैयारी है. सरकार निवेश और रोजगार बढ़ाने के साथ औद्योगिक गतिविधियों के पर्यावरणीय प्रभाव को सीमित रखने पर भी ध्यान दे रही है. हालांकि, तीनों औद्योगिक क्षेत्रों में निर्माण पूरा होने या उद्योग शुरू होने की कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है.
