नई दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की अनऑथराइज्ड कॉलोनियों में लाखों लोग सालों से अपने मकान बनाकर रह रहे हैं. इनमें बहुत से लोगों के सामने प्रॉपर्टी के कागजात और बने हुए मकान को नियमित कराने की परेशानी भी रहती है. इस प्रक्रिया में लगने वाला खर्च भी लोगों के लिए बड़ी चिंता है. अब ऐसे ही मकान मालिकों को राहत देने के लिए MCD ने कुछ शुल्कों पर 75 प्रतिशत तक की छूट को मंजूरी दी है.
बता दें कि यह राहत PM-UDAY कॉलोनियों में पात्र मकानों के बने हुए हिस्से को रेगुलर कराने से जुड़े कुछ चार्ज पर मिलेगी. फिलहाल, इसका फायदा लेने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक की समय सीमा बताई गई है. अगर आगे सरकार इस तारीख को बढ़ाती है तो बढ़ी हुई अवधि में भी छूट जारी रह सकती है.
इन चार्ज पर मिलेगी 75% तक छूट
अब अगर शुल्क की बात करें तो मकान को नियमित कराने के दौरान कम्पेन्सेटरी रेगुलेटरी चार्ज, C&D चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज और एडमिन/IT चार्ज जैसे शुल्क लगते हैं. इन पर अब 75 प्रतिशत तक अतिरिक्त छूट देने की मंजूरी दी गई है. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि इसका मतलब पूरे रेगुलाइजेशन खर्च में सीधे 75 प्रतिशत की कमी होना नहीं है. हर प्रॉपर्टी की स्थिति और उस पर लागू शुल्क अलग हो सकते हैं इसलिए भुगतान से पहले अपनी प्रॉपर्टी पर लगने वाले चार्ज की जानकारी जरूर देख लें.
मकान रेगुलर होना अलग बात
खास बात यह है कि PM-UDAY के तहत प्रॉपर्टी पर मालिकाना या ट्रांसफर से जुड़े अधिकार मिलना और मकान के बने हुए हिस्से का रेगुलाइजेशन एक ही प्रक्रिया नहीं है. दरअसल, किसी व्यक्ति के पास कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप होने भर से यह नहीं माना जा सकता कि मकान का पूरा निर्माण भी नियमित हो गया है. दोनों की स्थिति अलग-अलग जांचना जरूरी है.
1511 कॉलोनियों में चल रही प्रक्रिया
दिल्ली में अप्रैल 2026 की अधिसूचना के तहत 1511 अनऑथराइज्ड कॉलोनियों की पात्र प्रॉपर्टी को नियमित करने की प्रक्रिया चल रही है. इसके लिए MCD के SWAGAM पोर्टल के जरिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. वहीं, 6 अप्रैल 2026 तक मौजूद पात्र निर्माण को नियमित करने के लिए परमिट फीस, सुधार शुल्क, लेवी, अतिरिक्त लेवी, प्लिंथ शुल्क और कुछ अन्य शुल्क पहले ही हटाए जा चुके हैं.
कागजात कर लें तैयार
अगर कोई मकान मालिक इस प्रक्रिया का फायदा लेना चाहता है तो पहले अपनी प्रॉपर्टी की पात्रता और दस्तावेज जरूर जांच ले. मामले के हिसाब से सेल डीड, गिफ्ट डीड, पावर ऑफ अटॉर्नी, एग्रीमेंट टू सेल, पजेशन लेटर और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में सिर्फ 75 प्रतिशत तक की छूट देखकर आवेदन करने के बजाय यह भी देख लें कि आपकी कॉलोनी और प्रॉपर्टी योजना के दायरे में आती है या नहीं और मौजूदा निर्माण पर कितने शुल्क लागू हो रहे हैं.
