नई दिल्ली | नौकरी करने वाले लोगों के लिए PF की रकम भविष्य की बड़ी बचत होती है। रिटायरमेंट के बाद इसी पैसे से कई जरूरी खर्च पूरे किए जाते हैं लेकिन अब पीएफ से जुड़े नियमों में बदलाव हुआ है, जिसका असर कर्मचारियों के मासिक योगदान और भविष्य में मिलने वाली पेंशन पर पड़ सकता है। बता दें कि केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये मासिक कर दी है।

नया नियम 17 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है। इससे अधिक कर्मचारी पीएफ, पेंशन और बीमा सुविधाओं के दायरे में आएंगे। नए नियमों के अनुसार, पात्र कर्मचारी के 25 हजार रुपये मासिक पीएफ वेतन पर नियोक्ता के योगदान में से करीब 2,083 रुपये कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जा सकते हैं।
जमा होगी राशि
वहीं, कर्मचारी का 12 प्रतिशत योगदान पीएफ खाते में जमा होता है। नियोक्ता के योगदान का शेष हिस्सा भी पीएफ में जाता है। हालांकि, पेंशन में योगदान कर्मचारी की पात्रता और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। अगर किसी कर्मचारी का पेंशन योग्य वेतन 25 हजार रुपये और पेंशन योग्य सेवा 27 साल है, तो निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार मासिक पेंशन करीब 9,643 रुपये बन सकती है। इस उदाहरण में 25 साल की सेवा के साथ दो साल का अतिरिक्त सेवा लाभ शामिल है। सामान्यतः मासिक पेंशन के लिए कम से कम 10 साल की पात्र सेवा जरूरी होती है।
परिवार को मिलेंगे फायदे
EPS के तहत पात्र कर्मचारी की मृत्यु होने पर जीवनसाथी और बच्चों को निर्धारित शर्तों के अनुसार पारिवारिक पेंशन मिल सकती है। इसके अलावा EDLI योजना के तहत नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर पात्र परिवार को अधिकतम 7 लाख रुपये तक का बीमा लाभ मिल सकता है। ध्यान रहे कि हर कर्मचारी का पीएफ फंड 20 लाख रुपये कम होना तय नहीं है। असली रकम वेतन, सेवा अवधि, योगदान और ब्याज पर निर्भर करेगी।