सोनीपत | हर पिता के लिए बेटी का जन्म जिंदगी का खास पल होता है, लेकिन हरियाणा के गोहाना निवासी अशोक मलिक के लिए यह खुशी और भी यादगार बन गई। घर में नन्हीं परी के आने की खुशियां मनाई जा रही थीं, तो दूसरी ओर जापान में अशोक देश के लिए पदक जीतने की कोशिश में जुटे थे। इसी दौरान उन्होंने रजत पदक हासिल कर परिवार की खुशियों को दोगुना कर दिया। अशोक मलिक ने जापान में आयोजित एशियाई पैरा खेलों की पुरुषों की 65 किलोग्राम पैरा पावरलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता है।

उनकी पत्नी गीतिका ने तीन दिन पहले ही बेटी को जन्म दिया था। अशोक करीब 15 दिन पहले प्रतियोगिता में हिस्सा लेने जापान रवाना हुए थे। अब उन्होंने अपनी इस उपलब्धि को बेटी के नाम समर्पित किया है।
सीएम ने दी बधाई
अशोक ने बताया कि वह अभी तक बेटी का चेहरा ठीक से नहीं देख पाए हैं। घर लौटने के बाद वह अपनी नन्हीं परी को पदक पहनाकर उसके जन्म की खुशी मनाना चाहते हैं। उनके मुताबिक, बेटी के जन्म और देश के लिए पदक जीतने की खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। अशोक की उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फेसबुक के जरिए उन्हें बधाई दी। अशोक ने कहा कि मुख्यमंत्री से मिले प्रोत्साहन से खिलाड़ियों का हौसला बढ़ता है और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है। उनकी जीत से गोहाना और उनके पैतृक गांव मिर्जापुर खेड़ी में खुशी का माहौल है।
5 साल की उम्र में संघर्ष शुरू
अशोक की सफलता के पीछे मुश्किलों से भरी कहानी है। उनकी मां केलो देवी के मुताबिक, जब अशोक पांच साल के थे, तब उन्हें बुखार हुआ था। परिवार उन्हें एक निजी चिकित्सक के पास ले गया, जहां इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। वह लड़खड़ाकर गिरने लगे और ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे थे। इसके बाद परिवार उन्हें रोहतक ले गया, लेकिन वहां भी खास सुधार नहीं हुआ। फिर दिल्ली में उनका देशी उपचार कराया गया। धीरे-धीरे उनकी हालत में सुधार आया, मगर पैरों की कार्यक्षमता पहले जैसी नहीं रही।
शारीरिक परेशानी के बावजूद अशोक ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और खेलों में अपनी रुचि बनाए रखी। लंबे समय तक दिल्ली में पावरलिफ्टिंग का अभ्यास करने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई। आज उनकी इस जीत ने परिवार को गर्व करने का मौका दिया है।