चंडीगढ़ | हरियाणा में दक्षिण-पश्चिम मानसून का चार महीने का सफर इस बार बारिश के बड़े घाटे के साथ समाप्त हुआ. 1 जून से 30 सितंबर के बीच प्रदेश में 322.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य स्तर 430.7 मिलीमीटर है. इस तरह पूरे मानसून सीजन में हरियाणा को सामान्य से करीब 25 प्रतिशत कम बारिश मिली.
प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश का अंतर काफी बड़ा रहा. जींद में सबसे अधिक कमी दर्ज की गई, जबकि पलवल ऐसा अकेला जिला रहा जहां सीजन की बारिश सामान्य स्तर से ऊपर पहुंची.
जींद में 57% की कमी
जींद में मानसून सीजन के दौरान केवल 169.3 मिलीमीटर बारिश हुई. जिले का सामान्य आंकड़ा 394.4 मिलीमीटर है. इस तरह यहां बारिश की कमी 57 प्रतिशत तक पहुंच गई. दूसरी तरफ पलवल में स्थिति बिल्कुल अलग रही. जिले में 479.2 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य से करीब 20 प्रतिशत अधिक है. सिरसा में बारिश का घाटा 55 प्रतिशत रहा. अंबाला में सामान्य से 48 प्रतिशत, रोहतक में 46 प्रतिशत और कैथल में 44 प्रतिशत कम बारिश हुई. यमुनानगर में 727.7 मिलीमीटर और पंचकूला में 695.2 मिलीमीटर पानी बरसा. ज्यादा बारिश का आंकड़ा होने के बावजूद दोनों जिलों में अपने सामान्य स्तर की तुलना में 19-19 प्रतिशत की कमी रही.
बढ़ाया बारिश का घाटा
पूरे सीजन के आंकड़ों में जून और सितंबर सबसे कमजोर महीनों में रहे. जून में हरियाणा में सामान्य 55.3 मिलीमीटर के मुकाबले सिर्फ 30.5 मिलीमीटर बारिश हुई. यानी महीने का घाटा करीब 45 प्रतिशत रहा. जुलाई में सामान्य 150.5 मिलीमीटर की तुलना में 109.7 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई. यहां भी 27 प्रतिशत की कमी रही.
अगस्त में मानसून की स्थिति कुछ बेहतर हुई और प्रदेश में 138.8 मिलीमीटर बारिश हुई.
इस महीने सामान्य बारिश 147.7 मिलीमीटर मानी जाती है, इसलिए कमी केवल 6 प्रतिशत रही. सितंबर आते-आते बारिश फिर कमजोर हो गई और महीने का घाटा 44 प्रतिशत तक पहुंच गया.
| महीना | सामान्य बारिश | दर्ज बारिश | कमी |
|---|---|---|---|
| जून | 55.3 MM | 30.5 MM | 45% |
| जुलाई | 150.5 MM | 109.7 MM | 27% |
| अगस्त | 147.7 MM | 138.8 MM | 6% |
| सितंबर | उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार | उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार | 44% |
| पूरा सीजन | 430.7 MM | 322.5 MM | 25% |
