हिसार | हरियाणा की बेटियां खेल के मैदान से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक लगातार अपनी पहचान बना रही हैं. इसी बीच हिसार जिले के बालक गांव की रहने वाली पर्वतारोही रीना भट्टी ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है. रीना ने 17 सितंबर 2026 को 7,355 मीटर ऊंची अबी गमिन टेक्निकल पीक पर पहुंचकर तिरंगा फहराया. आज हम रीना की पूरी जिंदगी, उनका संघर्ष हर एक छोटी चीज के बारे में बात करेंगे जो महिलाओं को उनकी एबिलिटी ग्रोथ करने के साथ- साथ हमें यह भी मैसेज देगा कि लड़कियां किसी से भी कम नहीं होती, जिसका जीता जागता उदाहरण रीना हैं… आइए जानते हैं विस्ताक से यहां…
इस अभियान में रीना सिविलियन टीम की लीडर थीं. 12 सदस्यों वाली सिविलियन टीम में वह अकेली महिला थीं. रीना के अनुसार, यह आईटीबीपी, भारतीय सेना, अर्जेंटीना और सिविलियन सदस्यों से जुड़ा संयुक्त अभियान था.
रोज चलीं 9 से 11 घंटे
ऊंचे पहाड़ पर पहुंचना रीना के लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था. पूरा अभियान 23 दिनों तक चला. इस दौरान कई बार उन्हें रोजाना करीब 9 से 11 घंटे तक पैदल चलना पड़ा. रीना के मुताबिक, कैंप-3 से कैंप-5 के बीच हालात और ज्यादा मुश्किल हो गए थे. करीब पांच दिनों तक पर्याप्त खाना नहीं मिल पाया और कई घंटों तक पानी की भी भारी कमी रही. इन परेशानियों के बाद भी उन्होंने चढ़ाई जारी रखी और आखिरकार चोटी तक पहुंच गईं. बता दें कि वह स्वतंत्र सिविलियन पर्वतारोही के रूप में अबी गमिन चोटी फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनी हैं.
रीना के लिए पहाड़ों पर जीत हासिल करना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले वह माउंट एवरेस्ट और माउंट ल्होत्से पर 20 घंटे 50 मिनट के अभियान में तिरंगा फहराने वाली पहली भारतीय महिला बनने की उपलब्धि भी अपने नाम कर चुकी हैं. उनके मुताबिक, वह अब तक कुल 23 पर्वत चोटियों को फतह कर चुकी हैं.
बालक गांव से शुरू हुआ सफर
रीना हिसार के बालक गांव की रहने वाली हैं और उनके पिता ट्रैक्टर मैकेनिक हैं. परिवार में उनके दो भाई और एक बड़ी बहन हैं. मां के निधन के बाद उनके जीवन में मुश्किल समय आया, लेकिन उन्होंने खुद को संभाला और पर्वतारोहण में आगे बढ़ती रहीं. उनके अनुभव की बात करें तो पहाड़ इंसान के धैर्य, हिम्मत और इच्छाशक्ति की परीक्षा लेते हैं. मुश्किल हालात रास्ते में रुकावट जरूर बन सकते हैं, लेकिन मजबूत इरादे के साथ मंजिल तक पहुंचा जा सकता है.
