कुरुक्षेत्र | किसानों के लिए फसल खराब होना किसी बड़े नुकसान से कम नहीं होता। कई बार मौसम की मार से महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसी नुकसान से बचने के लिए किसान अपनी फसलों का बीमा करवाते हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर उन्हें आर्थिक मदद मिल सके लेकिन कई बार बीमा करवाने और प्रीमियम जमा करने के बावजूद क्लेम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र में भी एक महिला किसान को ऐसी ही परेशानी का सामना करना पड़ा।

कुरुक्षेत्र के बसंतपुर गांव की रहने वाली किसान अमरजीत कौर को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग से बड़ी राहत मिली है। गेहूं की फसल का बीमा होने के बावजूद क्लेम नहीं मिलने के मामले में आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी की लापरवाही को सेवा में कमी माना है।
3 एकड़ में बोई थी गेहूं की फसल
दोनों को संयुक्त रूप से किसान को 43,870 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। अमरजीत कौर के पास बसंतपुर गांव में तीन एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने रबी सीजन 2021-22 के दौरान अपनी जमीन पर गेहूं की फसल लगाई थी। फसल को मौसम से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवाया था। इसके लिए उनके बैंक खाते से 1,202.92 रुपये प्रीमियम के रूप में काटे गए थे। हालांकि, मार्च 2022 में हुई भारी बारिश से गेहूं की फसल को नुकसान पहुंच गया। इसके बाद कृषि विभाग की टीम ने खेतों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान फसल में 58.52 प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया।
प्रीमियम कटने के बाद भी नहीं मिला क्लेम
फसल खराब होने के बाद अमरजीत कौर को उम्मीद थी कि बीमा योजना के तहत नुकसान की भरपाई हो जाएगी लेकिन प्रीमियम जमा होने और कृषि विभाग की ओर से नुकसान का आकलन किए जाने के बावजूद उन्हें बीमा राशि नहीं मिली। क्लेम के लिए प्रयास करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में शिकायत दर्ज करवाई। इसी बीच मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने क्लेम का भुगतान नहीं होने के पीछे बैंक की ओर से आवेदन संबंधी जानकारी पूरी नहीं किए जाने का तर्क दिया।
कंपनी के अनुसार, बैंक ने किसान के आवेदन के साथ जरूरी यूटीआर नंबर राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर दर्ज नहीं किया था। इसके चलते आवेदन का स्टेटस फ्रेश/अनपेड दिखाई दे रहा था। बीमा कंपनी ने यह भी बताया कि 24 अगस्त 2022 को 2,63,443.21 रुपये की समेकित प्रीमियम राशि बैंक को वापस कर दी गई थी।
किसान को मिलेंगे 58,870 रुपये
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने बैंक और बीमा कंपनी की ओर से हुई चूक को सेवा में कमी माना। आयोग ने दोनों को संयुक्त रूप से किसान को 43,870 रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए 10 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए पांच हजार रुपये देने होंगे।