रोहतक | जिंदगी में कई बार ऐसी परेशानियां सामने आ जाती हैं, जिनसे निकलना आसान नहीं होता। कुछ लोग इन मुश्किलों के आगे हार मान लेते हैं, तो कुछ अपनी हिम्मत से दूसरों के लिए मिसाल बन जाते हैं। हरियाणा के रोहतक में रहने वाली एक महिला ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। बचपन से चलने-फिरने में परेशानी होने के बावजूद उन्होंने खुद को आत्मनिर्भर बनाने के साथ ही जरूरतमंद लोगों की मदद करने का जिम्मा भी उठाया।

रोहतक के विकास नगर की रहने वाली शालू अरोड़ा करीब 20 वर्षों से गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध करा रही हैं। वह महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में पिछले 12 वर्षों से गैर-शिक्षण कर्मचारी के रूप में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं।
3 साल की उम्र में हुआ था पोलियो
शालू अरोड़ा के मुताबिक, जब वह करीब तीन साल की थीं, तब उन्हें पोलियो हो गया था। इसके कारण उनकी कमर में परेशानी होने लगी और चलना-फिरना मुश्किल हो गया। कहीं आने-जाने के लिए उन्हें परिवार या दूसरे लोगों की मदद लेनी पड़ती थी। हालांकि, वह हमेशा से अपने काम खुद करना चाहती थीं। इसी सोच के साथ उन्होंने स्कूटी चलाना सीखा। इससे उन्हें रोजमर्रा के कामों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हुई। जीवन में आने वाली परेशानियों के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने और अपने स्तर पर दूसरों की मदद करने का रास्ता चुना। नौकरी के साथ वह बच्चों की पढ़ाई और महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए भी काम कर रही हैं।
जरूरतमंदों को खिला रही खाना
उनके परिवार में शुरू से धार्मिक और सामाजिक कार्यों का माहौल रहा है। माता-पिता ने उन्हें बचपन से जरूरतमंद लोगों की मदद करना सिखाया। इसी प्रेरणा से उन्होंने अपने स्तर पर गरीब लोगों को भोजन कराना शुरू किया। पिछले करीब दो दशकों से वह जरूरतमंदों के लिए खाना तैयार कराती हैं और कई बार खुद भोजन बनाकर लोगों तक पहुंचाती हैं। वह झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों के पास भी भोजन लेकर जाती हैं, जिससे जरूरतमंद परिवारों को मदद मिल सके।
15 बच्चों को मुफ्त पढ़ा रही शालू
इसी बीच शालू ने गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का भी फैसला किया। उन्होंने बताया कि वह दिल्ली बाईपास के पास झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए करीब एक साल तक रोजाना जाती थीं। अब वह अपने आसपास रहने वाली घरेलू कामगार महिलाओं के बच्चों को निशुल्क पढ़ा रही हैं। फिलहाल, उनके पास 15 बच्चे पढ़ रहे हैं, जिनमें 12 लड़कियां और 3 लड़के शामिल हैं। घर की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए। वह खासतौर पर लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी
वहीं, शालू अरोड़ा ने समाज सेवा के काम को आगे बढ़ाने के लिए करीब दो साल पहले माय ट्रस्ट की शुरुआत की थी। अब वह इस ट्रस्ट के माध्यम से ऐसी जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की योजना बना रही हैं, जो घरेलू जिम्मेदारियों या दूसरी परेशानियों के कारण बाहर जाकर नौकरी नहीं कर पातीं। इसके लिए वह डिस्पोजल उत्पाद बनाने वाली मशीन लगाने की तैयारी कर रही हैं। हालांकि, यह योजना अभी तैयारी के स्तर पर है।