कुरुक्षेत्र | नवरात्र आते ही माता के मंदिरों में अलग ही रौनक देखने को मिलती है। सुबह से ही श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगते हैं और मंदिरों में माता के जयकारे गूंजते हैं। हरियाणा में भी कई ऐसे प्राचीन देवी मंदिर हैं, जहां दूर-दूर से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं। इन्हीं में कुरुक्षेत्र का प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर भी शामिल है। इस बार यहां नवरात्र उत्सव को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं। कुरुक्षेत्र स्थित मां भद्रकाली मंदिर में नवरात्र के अवसर पर भव्य सजावट, शोभायात्रा और भंडारे की व्यवस्था की गई है।

माता के भवन को सजाने के लिए देश के अलग-अलग शहरों के साथ विदेशों से भी विशेष फूल मंगवाए गए हैं। वहीं, उत्सव की शुरुआत में हजारों महिलाओं की कलश यात्रा और आकर्षक झांकियां शामिल करने की तैयारी है।
दाहिने घुटने से जुड़ी मान्यता
मां भद्रकाली मंदिर हरियाणा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। इसे प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ के रूप में मान्यता प्राप्त है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सती का दाहिना घुटना इसी स्थान पर गिरा था। इसी वजह से श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर का विशेष महत्व है। मंदिर से महाभारत काल की परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि पांडवों ने भी यहां माता की पूजा-अर्चना की थी। आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने और आशीर्वाद लेने के लिए इस मंदिर में पहुंचते हैं।
सजावट के लिए फूल
इस बार नवरात्र उत्सव के दौरान मंदिर की सजावट पर खास ध्यान दिया जा रहा है। माता के भवन को सजाने के लिए थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर से आर्किड के फूल मंगवाए गए हैं। इसके अलावा, मॉरिशस से एन्यूरियम और कोलंबिया से गुलदाउदी के फूल मंगवाने की व्यवस्था की गई है। वहीं, देश के दिल्ली, बेंगलुरु, पुणे और कोलकाता जैसे शहरों से भी विशेष फूल मंगवाए गए हैं। इन फूलों से माता के भवन को सजाया जाएगा, जिससे नवरात्र के दौरान मंदिर का स्वरूप और आकर्षक दिखाई देगा।
| मंदिर की व्यवस्था | निर्धारित समय |
|---|---|
| मंदिर के कपाट खुलने का समय | सुबह 5:15 बजे |
| मंगल आरती | सुबह 6 बजे |
| संध्या आरती | शाम 6 बजे |
| माता को भोग | सुबह और शाम की आरती के बाद |
| मंदिर के कपाट बंद होने का समय | रात 10 बजे |
5100 महिलाएं कलश लेकर होंगी शामिल
इसी बीच नवरात्र उत्सव की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से करने की तैयारी है। इस शोभायात्रा में माता की ज्योत के साथ 5100 महिलाएं कलश लेकर शामिल होंगी। इसके अलावा 52 शक्तिपीठों के प्रतीक त्रिशूल और 1100 लाल ध्वज भी शोभायात्रा का हिस्सा होंगे। शोभायात्रा में चार बैंड, 31 रथ और सात पैदल झांकियां शामिल करने की योजना है।
26 अक्टूबर तक चलेगा अन्न का भंडारा
मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था भी की गई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार, अन्न का भंडारा 26 अक्टूबर तक चलेगा। वहीं, व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए अलग भंडारा नवरात्र की सप्तमी तक आयोजित किया जाएगा।