चंडीगढ़ | हरियाणा में होमगार्ड जवानों की भर्ती और उनके ड्यूटी भत्ते से काटे जाने वाले पैसों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जवानों की शिकायत है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी हुई और वेलफेयर फंड के नाम पर जमा रकम के इस्तेमाल की पूरी जानकारी नहीं मिली। अब इस मामले की जांच के लिए एंटी करप्शन ब्यूरो ने दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं।

हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने होमगार्ड विभाग के मुख्यालय से 2026 तक की भर्तियों का रिकॉर्ड मांगा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नवंबर 2016 के बाद भर्ती बंद होने के बावजूद 2022 तक कुछ लोगों को नियमों से हटकर नौकरी दी गई।
भूमिका की होगी जांच
एसीबी ने नवंबर 2016 के बाद नामांकित होमगार्ड स्वयंसेवकों की संख्या और संबंधित अधिकारियों की जानकारी मांगी है। इसके अलावा भर्ती के लिए गठित कमेटियों, मुख्यालय से जारी आदेशों और अधिकारियों की निर्णय प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी तलब किया गया है। शिकायत के बाद बयान देने वाले 18 जवानों ने हरियाणा गृह रक्षक सेवा नियमावली, 1980 के तहत भर्ती प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
वेलफेयर फंड की कटौती
इसी बीच जवानों के ड्यूटी भत्ते से वेलफेयर फंड के लिए होने वाली कटौती की जांच भी की जाएगी। जानकारी के अनुसार, 1967 से यह कटौती की जा रही है। शुरुआत में 40 रुपये काटे जाते थे, जबकि अब यह राशि 300 रुपये तक पहुंच गई है। 2024 से सेवानिवृत्त जवानों को इस फंड से 31 हजार रुपये देने की व्यवस्था शुरू हुई। शिकायत में इससे पहले फंड के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
नेशनल होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक कर्मबीर अलेवा ने एसीबी से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि भर्ती और वित्तीय मामलों की जांच दस्तावेजों के आधार पर होनी चाहिए। गड़बड़ी साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।