चंडीगढ़ | सरकारी नौकरी में कई साल तक काम करने के बाद भी कर्मचारियों को पेंशन का पूरा लाभ न मिलना बड़ी परेशानी बन जाता है। खासकर उन लोगों के लिए, जिन्होंने शुरुआत में अस्थायी या अंशकालिक कर्मचारी के तौर पर सेवा दी और बाद में नियमित हुए। ऐसे कर्मचारियों को अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

हाई कोर्ट ने हरियाणा के सरकारी स्कूलों में अंशकालिक कर्मचारी के रूप में नियुक्त होकर बाद में नियमित हुए कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित नियुक्ति से पहले की लगातार सेवा को पेंशन योग्य सेवा की गणना से बाहर नहीं रखा जा सकता।
1980 से 2002 के बीच हुई थी नियुक्ति
यह मामला भिवानी निवासी सुनीता और अन्य कर्मचारियों की याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति वर्ष 1980 से 2002 के बीच अलग-अलग सरकारी स्कूलों में चतुर्थ श्रेणी के अंशकालिक कर्मचारियों के तौर पर हुई थी। लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें 11 नवंबर 2003 की नियमितीकरण नीति के तहत स्थायी किया गया।
कर्मचारियों का तर्क था कि उनकी सरकारी सेवा नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो चुकी थी। नई पेंशन योजना 28 अक्टूबर 2005 को अधिसूचित हुई और 1 जनवरी 2006 से लागू की गई। इसलिए नियमित होने से पहले की निरंतर सेवा भी पेंशन की गणना में जोड़ी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता पहले अंशकालिक आधार पर नियुक्त हुए थे और बाद में नियमित किए गए। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड बनाम सतनाम सिंह मामले का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाले कर्मचारियों को केवल तकनीकी आधार पर पेंशन के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
3 महीने में कार्रवाई के निर्देश
हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग को कर्मचारियों की शुरुआती नियुक्ति और नियमितीकरण की तारीखों का सत्यापन करने को कहा है। इसके बाद पेंशन और सेवानिवृत्ति से जुड़े लाभों की दोबारा गणना करनी होगी। कोर्ट ने आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के तीन महीने के भीतर देय लाभ जारी करने का निर्देश दिया है।