नई दिल्ली | राजधानी दिल्ली के अशोक विहार स्थित जेलरवाला बाग झुग्गी क्षेत्र को लेकर दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (DDA) ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है. प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि पूरी प्रक्रिया दिल्ली सरकार की 2015 की पुनर्वास नीति के अंतर्गत और पूरी तरह पारदर्शी तरीके से की गई है. जेलरवाला बाग की 1078 पात्र झुग्गी बस्तियों के निवासियों को पहले ही अशोक विहार के पास स्थित स्वाभिमान अपार्टमेंट्स के आधुनिक वन बीएचके फ्लैट्स में स्थानांतरित किया जा चुका है.
फ्लैट्स में दी गईं सभी सुविधाएं
इन फ्लैट्स में बेडरूम, लिविंग रूम, रसोई, बाथरूम, शौचालय और बालकनी सहित सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान की गई हैं. इसके बदले में केवल 1.41 लाख रुपए अनुदान लिया गया है, जबकि निर्माण की वास्तविक लागत लगभग 25 लाख रुपए प्रति फ्लैट रही है.
DDA के अनुसार, पुनर्वास की पात्रता के लिए 2012 से पहले की मतदाता सूची, पासपोर्ट, बिजली बिल, बैंक पासबुक या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज मांगे गए थे. जिनके पास ऐसे दस्तावेज नहीं थे या व्यावसायिक उपयोग हो रहा था, उन्हें अवैध घोषित किया गया.
तोड़ी झुग्गी संरचनाएं
DDA ने बताया कि अवैध घोषित किए गए 567 झुग्गीधारकों को भी अपील प्राधिकरण के समक्ष अपील का अवसर दिया गया था. अब तक 9 अपील स्वीकार की जा चुकी हैं और इन पात्र लोगों को जल्द ही लॉटरी के माध्यम से फ्लैट आवंटित किए जाएंगे. जिन झुग्गियों को दिल्ली हाई कोर्ट से स्टे प्राप्त हुआ है, केवल उन्हें छोड़ दिया गया है. बाकी जिन झुग्गी निवासियों को नए घर दिए जा चुके हैं, उनकी पुरानी झुग्गी संरचनाएं तोड़ी जा चुकी हैं.
