किसानों को कमाई का ढूंढना होगा नया रास्ता, औषधीय फसलों की खेती बनेगी बेहतर विकल्प

हिसार | किसानों के लिए धान, कपास और गेहूं जैसी परम्परागत खेती पर निर्भर रहकर जीवनयापन करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। खराब मौसम, लागत में वृद्धि और उचित भाव नहीं मिलना इस जोखिम को और ज्यादा बढ़ा रहा है। ऐसे में किसानों को परम्परागत खेती का मोह त्याग कर बागवानी और ऑर्गेनिक खेती में हाथ बढ़ाना होगा ताकि कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाया जा सके।

Pudina Kheti Tip

औषधीय खेती बनेगी कमाई का दूसरा जरिया

किसानों को अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए पारम्परिक खेती से हटकर कुछ नए विकल्पों को बड़े पैमाने पर आजमाना होगा, जिनकी हमेशा बाजार में मांग बनी रहती है। तुलसी, शतावरी, पुदीना, अश्वगंधा, हल्दी और एलोवेरा जैसी औषधीय फसलों की खेती ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जो किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है।

इससे किसान अपनी पूरी खेती को एक ही फसल पर निर्भर रखने की बजाय अलग-अलग फसलों में बांट सकते हैं। औषधीय फसलों की खेती कम समय में तैयार होती है और नकद बिक्री के चलते किसान आर्थिक रूप से मजबूत बने रहेंगे। इन फसलों का इस्तेमाल कई तरह की औषधियां और स्वास्थ्य से जुड़े उत्पाद बनाने में किया जाता है। ऐसे में इन फसलों की बाजार में सदैव मांग बनी रहती है।

पूरी खेती बदलने की नही जरूरत

औषधीय फसलों की खेती करने के लिए किसानों को अपनी पूरी खेती बदलने की जरूरत नहीं है बल्कि अपनी जमीन के एक हिस्से में तुलसी, शतावरी, पुदीना, अश्वगंधा, हल्दी और एलोवेरा जैसी फसलें लगाकर छोटी शुरुआत कर सकते हैं। अगर उत्पादन, बिक्री और लागत का अनुभव अच्छा रहता है तो अगले सीजन में बड़े स्तर पर इसकी खेती की जा सकती है।

Avatar of Haryana E Khabar
Haryana E Khabar
View all posts