चंडीगढ़ | हरियाणा में अपना कारोबार शुरू करने या नई फैक्ट्री लगाने की सोच रहे लोगों को जमीन से जुड़ी मंजूरी लेने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जरूरी कागजात तैयार करने और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने में समय भी लग सकता है। अब प्रदेश सरकार ने कारोबारियों की इस परेशानी को कम करने के लिए नियमों में बदलाव किया है, जिससे उद्योग लगाने की प्रक्रिया पहले से आसान होने की उम्मीद है। बता दें कि हरियाणा सरकार ने औद्योगिक परियोजनाओं के लिए ऑनलाइन स्व-प्रमाणन की सुविधा शुरू करने का प्रावधान किया है।

इसके तहत आवेदक जमीन से संबंधित जानकारी, जरूरी दस्तावेज और निर्धारित शर्तों के पालन का प्रमाण खुद जमा कर सकेंगे। इस प्रक्रिया से प्राप्त अनुमति को नगर तथा ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक की ओर से दी गई मंजूरी के बराबर माना जाएगा।
अमान्य होगी मंजूरी
नई व्यवस्था में आवेदन करने वाले व्यक्ति को अपने दस्तावेजों की सत्यता की जिम्मेदारी खुद उठानी होगी। अगर कोई आवेदक गलत जानकारी देता है, जरूरी तथ्य छिपाता है या भ्रामक दस्तावेज जमा करके अनुमति हासिल करता है, तो उसकी मंजूरी शुरुआत से ही अमान्य मानी जाएगी। ऐसे में कारोबारियों को आवेदन करते समय सभी जानकारी सही और पूरी देनी होगी।
यह नियम रहेंगे लागू
वहीं, औद्योगिक अनुमति मिलने के बाद भी जमीन का इस्तेमाल मनमाने तरीके से नहीं किया जा सकेगा। संबंधित जमीन या भवन का उपयोग उस क्षेत्र की विकास योजना में तय प्रमुख भूमि उपयोग के अनुसार ही करना होगा। इसके लिए सरकार ने पंजाब अनुसूचित सड़कों तथा नियंत्रित क्षेत्रों में अनियमित विकास पर रोक संबंधी नियम, 1965 में संशोधन किया है।