नई दिल्ली | रबी सीजन शुरू होते ही किसान गेहूं की बुवाई की तैयारियों में जुट जाते हैं। हर किसान चाहता है कि खेत में ऐसी किस्म लगाई जाए, जिससे अच्छी पैदावार मिले और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर रहे। ऐसे में गेहूं की एक उन्नत किस्म किसानों के लिए अच्छा विकल्प बन सकती है, जिसमें उत्पादन के साथ पोषक तत्वों पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के इंदौर स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र ने पूसा बायोफोर्टिफाइड गेहूं सम्राट HI 1683 विकसित की है। यह ब्रेड गेहूं की किस्म है, जिसका इस्तेमाल आटा, रोटी और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करने में किया जा सकता है।
1 हेक्टेयर में इतनी पैदावार
इस किस्म की औसत पैदावार करीब 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। वहीं, अनुकूल मौसम और बेहतर फसल प्रबंधन की स्थिति में इसका उत्पादन 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच सकता है। हालांकि, हर खेत में इतनी पैदावार मिलना जरूरी नहीं है। वास्तविक उत्पादन मिट्टी, मौसम, सिंचाई और खेती के तरीकों पर निर्भर करेगा। HI 1683 किस्म को पोषण की गुणवत्ता बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
इसके दानों में लगभग 11.7 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। इसके अलावा करीब 40.4 पीपीएम आयरन और 38.3 पीपीएम जिंक की मात्रा बताई गई है। इस तरह यह किस्म अच्छी पैदावार के साथ पोषण के लिहाज से भी उपयोगी हो सकती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- किसानों को इस किस्म की बुवाई के लिए प्रमाणित बीजों का इस्तेमाल करना चाहिए।
- इसके अलावा, बुवाई का सही समय, बीज की मात्रा, खाद और सिंचाई का प्रबंधन भी जरूरी है।
- फसल को रोगों और कीटों से बचाने के लिए नियमित निगरानी करनी चाहिए।
- किसान अपने क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर इसकी खेती कर सकते हैं।