चंडीगढ़ | हरियाणा के प्रजापति समाज को आवंटित की गई जमीन पर अवैध कब्जों को हटाया जाएगा. इस विषय में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने शिकायतों पर संज्ञान लिया है. इसके बाद, मुख्य सचिव हरियाणा और जिला आयुक्त को नोटिस भेजकर 1 महीने के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं. अब प्रशासन द्वारा अवैध कब्जों वाली जगह की पहचान करने का काम शुरू कर दिया गया है.
प्रभावशाली लोगों पर कब्जे का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, प्रजापति समाज द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखित शिकायत दी गई थी. इसमें कहा गया कि पंचायत द्वारा उन्हें आवंटित जमीन पर गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने कब्जा कर लिया है. इसके कारण वे मिट्टी के बर्तन बनाने जैसे पारंपरिक कार्य करने में असमर्थ हैं.
1966 में मिली थी भूमि
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1966 में चकबंदी के समय प्रदेश के सभी गांवों में गोचर भूमि की तर्ज पर 7000 से 8000 एकड़ भूमि आवे- पजावे के उपयोग के लिए दी गई थी. गुरुग्राम के फरुखनगर, सोहना, झज्जर, नारनौल और चरखी दादरी सहित कई जिलों में प्रभावशाली लोगों द्वारा इन जमीनों पर कब्जे कर लिए गए. इस कारण कुमार समाज के लोग अपने परंपरागत काम को नहीं कर पा रहे हैं.
मजबूरीवश उन्हें अन्य स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा. प्रदेश सरकार द्वारा गोचर भूमि को लेकर कई बार अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया, लेकिन प्रजापति समाज की भूमि पर अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
