गैजेट डेस्क | आजकल लोग एक ही मैसेजिंग ऐप को मोबाइल, कंप्यूटर और टैबलेट पर इस्तेमाल करते हैं। कई बार अकाउंट से जुड़ा सिम कार्ड दूसरे फोन में लगा रहता है, फिर भी ऐप चलता रहता है। अब इस व्यवस्था में बदलाव होने जा रहा है, जिससे कुछ यूजर्स को अपनी आदत बदलनी पड़ सकती है। बता दें कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने WhatsApp, Telegram समेत आठ मैसेजिंग ऐप्स के लिए सिम-बाइंडिंग अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं।

दरअसल, 1 जनवरी 2027 से इन सेवाओं को यूजर के रजिस्टर्ड भारतीय मोबाइल नंबर से जुड़ा एक्टिव सिम उसी डिवाइस में होने की शर्त का पालन करना होगा। इस नियम के दायरे में WhatsApp, Telegram, Snapchat, Arattai, ShareChat, Josh, JioChat और Signal शामिल हैं।
सिम बाइंडिंग नियम
नए प्रावधान के तहत ऐप से जुड़े नंबर का सिम कार्ड फोन में मौजूद और एक्टिव रहना जरूरी होगा। सिम निकालने या उसके बंद होने पर ऐप का इस्तेमाल प्रभावित हो सकता है। इससे उन लोगों को परेशानी हो सकती है जो रजिस्टर्ड नंबर का सिम दूसरे फोन में रखते हैं या एक ही अकाउंट कई डिवाइस पर चलाते हैं।
.@DoT_India’s directions for SIM binding for prevention of misuse of telecommunication identifiers for ensuring telecom cyber security
App Based Communication Services that are utilizing Indian Mobile Number for identification of its customers/users or for provisioning or delivery of services to comply within 90 days
Apps offering web access must enforce periodic logout and re-linking, preventing remote misuse of accounts authenticated once and operated from abroad
Mandatory SIM binding, already standard in banking/UPI systems, now extended to communication apps to counter phishing, digital arrest, impersonation and investment scams
Read here: https://t.co/yJ9JLEV163
— PIB India (@PIB_India) December 1, 2025
DoT ने ये निर्देश 28 नवंबर 2025 को टेलीकॉम साइबर सिक्योरिटी नियमों के तहत जारी किए थे। शुरुआत में कंपनियों को 90 दिन मिले थे, लेकिन उद्योग जगत की मांग पर समयसीमा बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी गई।
यूजर्स पर पड़ेगा असर
ज्यादातर लोगों को बदलाव के लिए अलग से कुछ नहीं करना पड़ेगा, अगर वे अपने रजिस्टर्ड नंबर का एक्टिव सिम उसी फोन में रखते हैं। हालांकि, फोन बदलने, सिम दूसरे डिवाइस में रखने और वेब या डेस्कटॉप पर ऐप चलाने वालों को नई शर्तों के अनुसार व्यवस्था करनी पड़ सकती है। वेब और डेस्कटॉप संस्करणों के लिए सरकार ने हर 6 घंटे में अनिवार्य लॉगआउट की जगह जोखिम के आधार पर व्यवस्था अपनाने की बात कही है। ऐसे में कंपनियों को नियमों के मुताबिक अपनी सेवाओं में बदलाव करना होगा।