करनाल | आमतौर पर ऐसा देखा जाता है कि जब भी सर्दियों का मौसम शुरू होता है, तो पराली जलाने की घटनाएं सामने आना शुरू हो जाती हैं. इससे वायु प्रदूषण होता है. लोगों को आंखों में जलन और त्वचा संबंधित बीमारियां होने का खतरा भी बना रहता है. इन सबसे निजात पाने को सरकार द्वारा किसानों को प्रोत्साहन राशि देने की भी शुरुआत की गई, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं. इससे तमाम योजनाएं धरी की धरी रह जाती है.
शेखर ने तोड़े मिथक
इसके बावजूद, कुछ युवा ऐसे भी हैं जो अपने हुनर का इस्तेमाल करके न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं, बल्कि अच्छा खासा पैसा भी कमा रहे हैं. करनाल के गांव औंगद का युवक शेखर राणा इसी का एक जीता जागता उदाहरण हैं. शेखर अवशेष प्रबंधन से लाखों रुपए कमा रहे हैं और लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं. 4 साल पहले शेखर ने एक बेलर मशीन से इस काम की शुरुआत की थी.
उनके विदेश जाकर बसने का सपना था, लेकिन उन्होंने अपने इस विचार को त्याग कर गांव में ही कुछ करने की ठानी. उन्होंने अवशेष प्रबंधन को ही व्यापार का जरिया बनाने की सोची. इसमें वह कामयाब भी हुए और आज पुश्तैनी 22 एकड़ जमीन से अच्छा खासा कमा रहे हैं.
60 युवकों को दे रहे रोजगार
शुरू में उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए साल 2021 में एक बेलर मशीन खरीदी. उसके बाद दूसरे साल धान सीजन में दो बेलदार मशीनें खरीद ली. कमाई बढ़ने के बाद तीसरे वर्ष उन्होंने अपने साथियों के साथ चार बेलर मशीन, स्वयं के 8 ट्रैक्टर, लीज पर लिए हुए सीजन के लिए अलग से 11 ट्रैक्टर के अलावा 4 बेलर मशीन, 3 रैंक, 4 कटर, सहित पराली के बने गट्ठों के उठान के लिए 10 ट्रैक्टर, ट्रालियां खरीद ली हैं. आज वह लगभग 60 युवकों को रोजगार दे रहे हैं. वह पराली के गट्ठे बनाकर अपने खेतों में स्टॉक लगाते हैं और आइओसीएल पानीपत रिफाइनरी में उन्हें पहुंचा देते हैं. इससे उन्हें अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है.
