भारत का पहला पेट्रोल पंप, हाथ से चलने वाली मशीनों से भरता था ईंधन; जानें कब हुई शुरुआत?

नई दिल्ली | आज देशभर में हर कुछ किलोमीटर पर पेट्रोल पंप दिखाई दे जाते हैं, जहां डिजिटल मशीनों से कुछ ही मिनटों में ईंधन भर जाता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का पहला पेट्रोल पंप कब और कहां शुरू हुआ था? इसकी कहानी भारतीय परिवहन इतिहास का एक अहम अध्याय मानी जाती है. भारत का पहला सार्वजनिक पेट्रोल पंप साल 1928 में तत्कालीन बॉम्बे (अब मुंबई) में शुरू किया गया था.

petrol pump

इसकी स्थापना बर्मा शेल कंपनी ने की थी. बाद में राष्ट्रीयकरण के बाद यही कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) का हिस्सा बन गई. उस दौर में सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत कम थी, इसलिए पहला पेट्रोल पंप खुलना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना गया.

भारत का पहला पेट्रोल पंप

पेट्रोल पंप शुरू होने से पहले ईंधन बड़े ड्रमों और टिन के डिब्बों में बेचा जाता था. वाहन मालिकों को वहीं से पेट्रोल खरीदकर अपनी गाड़ियों में भरना पड़ता था. सार्वजनिक पेट्रोल पंप खुलने के बाद लोगों को एक तय स्थान पर आसानी से ईंधन मिलने लगा, जिससे सफर करना पहले से अधिक सुविधाजनक हो गया. आज की तरह उस समय डिजिटल डिस्पेंसर या इलेक्ट्रॉनिक मीटर नहीं होते थे. पेट्रोल भरने के लिए हाथ से चलने वाले डिस्पेंसर का इस्तेमाल किया जाता था. वहीं ईंधन की मात्रा मापने के लिए मैकेनिकल मीटर लगाए जाते थे, जिनकी मदद से पेट्रोल नापा जाता था.

भरोसा जीतना चुनौती

शुरुआती दौर में ग्राहकों को तुरंत स्क्रीन पर मात्रा और कीमत दिखाई नहीं देती थी. ऐसे में लोगों का विश्वास जीतना बड़ी चुनौती थी. बाद में बर्मा शेल ने ऐसे डिस्पेंसर अपनाए, जिनमें ग्राहक अपनी आंखों से देख सकते थे कि उन्हें कितनी मात्रा में पेट्रोल मिल रहा है. यही व्यवस्था आगे चलकर आधुनिक पेट्रोल पंपों की नींव बनी और ईंधन वितरण प्रणाली अधिक भरोसेमंद बन गई.

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Sanjukta Pandit
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मेरा नाम संयुक्ता पंडित है. मै हरियाणा ई खबर में बतौर एडिटर के पोस्ट पर लगभग 4 सालों से काम रही हूँ. मेरी हमेशा कोशिश रहती है आप लोगो तक ब्रेकिंग न्यूज़ जल्द से जल्द अपडेट करूं और न्यूज़ में कोई व्याकरण की गलती न हो.