नई दिल्ली | किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार कार्ड डी- एक्टिवेट किया जा सकता है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) और भारत के महापंजीयक इसके लिए एक तंत्र बनाने और पेश करने पर काम कर रहा है. दरअसल, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार डिएक्टिवेट नहीं होता है क्योंकि फिलहाल ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. केंद्र सरकार ने लोकसभा में कहा था कि फिलहाल किसी मृत व्यक्ति का आधार नंबर रद्द करने की कोई व्यवस्था नहीं है.

सरकार ने भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के संशोधन के मसौदे पर UIDAI से सुझाव मांगे थे. बताया गया कि मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करते समय मृतक का आधार लिया जा सकता है. यह अब नहीं होता है. सुझाव मांगने के साथ प्रक्रिया पर चर्चा शुरू हुई. यदि मृत्यु के बाद आधार नंबर लेने की प्रक्रिया जन्म एवं मृत्यु पंजीयक और यूडीएआइ के बीच शुरू हो जाती है तो इसका गलत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है.
आधार को लेकर सरकार की तैयारियां
इसके अलावा, सरकार देश भर में जन्म प्रमाण पत्र के साथ आधार नंबर भी आवंटित करने की योजना पर काम कर रही है. वर्तमान में 20 राज्यों ने इस प्रणाली को लागू किया है. इसमें 5 साल तक के बच्चों का कोई बायोमेट्रिक नहीं लिया जाता है. उन्हें उनके माता- पिता की सूचना के आधार पर रिहा किया जाता है. बायोमेट्रिक्स (दस उंगलियां और एक चेहरे की तस्वीर) तब ली जाती है जब बच्चा 5 और 15 साल का हो जाता है.
आधार को लेकर सबसे जरूरी ये है काम
अगर आपने अभी तक अपने पैन को आधार से लिंक नहीं कराया है तो जल्द करा लें. अगर आप 31 मार्च 2023 तक ऐसा नहीं करते हैं तो आपका पैन निष्क्रिय हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) 30 जून, 2022 से पैन को आधार से जोड़ने के लिए 1000 रुपये का विलंब शुल्क ले रहा है.