रोहतक | हरियाणा के रोहतक जिले के भैणी चंद्रपाल गांव में ऐसा नजारा देखने को मिला, जब 24 घंटे के लिए गांव में बाहरी लोगों की एंट्री रोक दी गई. जी हां, और ग्रामीणों ने भी बाहर कदम नहीं रखा. इसके पीछे कोई प्रशासनिक आदेश नहीं था. दरअसल, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह करीब 300 साल पुरानी धार्मिक और सामाजिक परंपरा है. ग्रामीण आज भी इस परंपरा को उसी श्रद्धा के साथ निभाते हैं और तय समय तक गांव की सीमा बंद रखते हैं.
इस परंपरा में गांव की सुख- शांति के साथ पशुओं के स्वस्थ रहने की कामना की जाती है. इसकी शुरुआत गांव के बड़े जोड़ पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर से हुई. यहां पूजा- अर्चना के बाद युवाओं ने धूनी ली और फिर अलग- अलग टोलियों में गांव की ओर निकल पड़े.
हर घर और गली तक पहुंचाई धूनी
युवाओं ने गांव की गलियों से होते हुए प्रत्येक घर तक धूनी पहुंचाई. इसके साथ गांव में रहने वाले लोगों और पशुओं के स्वस्थ रहने तथा सुख- शांति की कामना की गई. खास बात यह रही कि इस पूरी प्रक्रिया में गांव के युवाओं ने बढ़-चढ़कर जिम्मेदारी संभाली. परंपरा के नियमों के अनुसार, 24 घंटे तक गांव की सीमा सील रखी गई. इस दौरान न तो किसी बाहरी व्यक्ति को गांव में प्रवेश करने की अनुमति रही और न ही ग्रामीणों को गांव से बाहर जाने दिया गया.
पशुओं से जुड़ी है मान्यता
ग्रामीण बताते हैं कि उनके बुजुर्ग भी इसी तरह इस परंपरा को निभाते आए हैं. मान्यता है कि पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका होने या गांव में सुख- शांति बनाए रखने के लिए धूनी देने की यह प्रक्रिया की जाती है. समय के साथ गांव में कई बदलाव आए, लेकिन यह परंपरा बरकरार है. ग्रामीण सामूहिक रूप से इसके नियमों का पालन करते हैं. वहीं नई पीढ़ी की भागीदारी के कारण करीब 300 साल से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाने का सिलसिला भी जारी है.
