पंचकूला | हरियाणा के पंचकूला जिले का बुंगा गांव अब अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ एक नई पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. दरअसल, चंडीगढ़ की रहने वाली कविता की बदौलत बरवाला ब्लॉक के इस गांव में पहाड़ों के बीच बने डैम को विकसित किया जा रहा है. यहां सैर करने के लिए ट्रैक, सोलर लाइटें और अन्य सुविधाएं तैयार की गई हैं. इस पहल के पीछे गांव की सरपंच कविता चौधरी की सोच है, जो बुंगा में ही सुखना लेक जैसा सुंदर सार्वजनिक स्थल विकसित करना चाहती हैं.
कविता मूल रूप से चंडीगढ़ के एक गांव की रहने वाली हैं. शादी के बाद वह बुंगा आईं और अब सरपंच के रूप में गांव के विकास की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. सरपंच कविता चौधरी के अनुसार, चंडीगढ़ में रहते हुए उन्होंने सुखना लेक की खूबसूरती देखी थी.
सैर करने में सुविधा
बुंगा आने के बाद उन्हें लगा कि गांव में पहाड़ों के बीच मौजूद डैम को भी स्थानीय लोगों के लिए घूमने की अच्छी जगह बनाया जा सकता है. इसी विचार के तहत कई करोड़ रुपये की लागत से डैम के आसपास विकास कार्य शुरू किए गए. परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है. डैम किनारे करीब 500 मीटर लंबा और चौड़ा ट्रैक तैयार किया गया है. यहां सोलर लाइटें भी लगाई गई हैं, ताकि शाम के समय लोगों को सैर करने में सुविधा हो. ट्रैक से पहाड़ों और सूर्यास्त का नजारा दिखाई देता है.
इस परियोजना में जल संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है. डैम से निकलने वाले ओवरफ्लो पानी को आगे बने तालाब में इकट्ठा किया जा रहा है. इससे अतिरिक्त पानी को संरक्षित करने के साथ पशुओं के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी हो रही है. ग्रामीणों के लिए यह स्थान सैर-सपाटे के साथ जल संरक्षण का केंद्र भी बन रहा है.
नाव और कॉटेज बनाने की तैयारी
पंचायत भविष्य में डैम के आसपास पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने पर विचार कर रही है. यहां नाव चलाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं. इसके अलावा खाने-पीने की सुविधा वाला कॉटेज बनाने और डैम के दोनों ओर पैदल ट्रैक को आगे विकसित करने की योजना है. कविता चौधरी का कहना है कि गांव की महिलाओं और परिवारों को घूमने के लिए चंडीगढ़ जाने के बजाय अपने गांव में ही अच्छा स्थान मिलना चाहिए. उनकी कोशिश डैम को पर्यटन से जोड़ने के साथ जल संरक्षण और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की भी है. हालांकि, नाव और कॉटेज से जुड़ी योजनाएं अभी प्रस्तावित स्तर पर हैं.
