करनाल | किसान कई महीनों तक मेहनत करके फल और सब्जियों की फसल तैयार करता है, लेकिन असली परेशानी कटाई के बाद शुरू होती है. टमाटर, हरी सब्जियां और दूसरे बागवानी उत्पाद ज्यादा दिनों तक सुरक्षित नहीं रह पाते. आसपास कोल्ड स्टोरेज नहीं मिले तो किसान को कई बार कम भाव में ही फसल बेचनी पड़ती है. अब इसी परेशानी का हल निकालने के लिए करनाल में नई तकनीक पर काम शुरू हुआ है.
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय करनाल और ब्रिटेन की ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन ने मिलकर सोल टेक प्रोजेक्ट शुरू किया है. इसके तहत सौर ऊर्जा से चलने वाले छोटे और मध्यम कोल्ड स्टोरेज तैयार करने पर काम किया जा रहा है, जिन्हें गांवों और मंडियों के आसपास लगाया जा सकेगा.
बिजली-डीजल की जरूरत नहीं
अभी ज्यादातर कोल्ड स्टोरेज को चलाने के लिए बिजली या डीजल की जरूरत पड़ती है. इससे इन्हें चलाने का खर्च भी बढ़ जाता है. सोल टेक में वैज्ञानिक ऐसे कोल्ड स्टोरेज मॉडल पर काम कर रहे हैं, जो सौर ऊर्जा से चल सकें. इसका फायदा खासकर उन ग्रामीण इलाकों में हो सकता है, जहां कोल्ड स्टोरेज की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं है. किसान अपनी जल्द खराब होने वाली उपज को कुछ समय तक सुरक्षित रख सकेंगे और बाजार में बेहतर भाव मिलने का इंतजार कर सकेंगे.
तैयार होगी अलग गाइडलाइन
प्रोजेक्ट केवल कोल्ड स्टोरेज तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा. फल और सब्जियों को कितने तापमान और कितनी नमी में रखना चाहिए, इस पर भी वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. हर फसल की जरूरत अलग होने के कारण उसके हिसाब से स्टोरेज की गाइडलाइन और डेटाबेस तैयार किया जाएगा. इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किसी खास फल या सब्जी को किस स्थिति में कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
करोड़ों टन हो जाती हैं खराब
इस प्रोजेक्ट की जरूरत के पीछे फसल कटाई के बाद होने वाला नुकसान भी बड़ी वजह है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल करीब 4 से 5 करोड़ टन फल और सब्जियां खेत से बाजार तक पहुंचने के दौरान खराब हो जाती हैं. जल्द खराब होने वाली कुछ फसलों में नुकसान और ज्यादा हो सकता है. इसी बीच दोनों विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिक प्रोजेक्ट के तकनीकी डिजाइन और भारतीय मैदानी इलाकों की जलवायु के हिसाब से इसके इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं.
महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसके मल्होत्रा के मुताबिक, सोलर कोल्ड स्टोरेज किसानों को अपनी फसल सुरक्षित रखने और बेहतर भाव का इंतजार करने का ऑप्शन दे सकते हैं. वहीं, सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से बिजली और डीजल पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा.
