यमुनानगर | टीचर छोटे बच्चों को अगर केवल किताब खोलकर जोड़-घटा या हिंदी के शब्द समझाए जाएं तो कई बार उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता लेकिन वही सवाल अगर खेल और रंग-बिरंगी चीजों के साथ सामने आए तो बच्चे जल्दी समझ लेते हैं. यमुनानगर के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने इसी तरीके को अपनी पढ़ाई का हिस्सा बना लिया है. बता दें कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला मिल्क खास में JBT शिक्षक पवन कुमार बच्चों को पढ़ाने के लिए थर्माकोल, कागज और घर में बेकार पड़े सामान का इस्तेमाल करते हैं. इन चीजों से वह ऐसी शिक्षण सामग्री बनाते हैं, जिसे बच्चे देखकर और खुद इस्तेमाल करके सवालों के जवाब समझ सकें.

पवन कुमार ने थर्माकोल से एक पेड़ तैयार किया है, जिस पर कागज की पत्तियां और फल लगाए जाते हैं. बच्चे पहले इनकी गिनती करते हैं और फिर इन्हीं की मदद से जोड़ने और घटाने के सवाल हल करते हैं.
अलग सामग्री तैयार
वहीं, हिंदी के विपरीतार्थक शब्द समझाने के लिए भी उन्होंने अलग सामग्री तैयार की है. इसमें एक शब्द को हटाने पर उसके पीछे दूसरा शब्द दिखाई देता है. इससे बच्चों को केवल रटने के बजाय चीजों को देखकर समझने का मौका मिलता है. खास बात यह है कि ऐसी शिक्षण सामग्री अभिभावकों को भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे बच्चे घर पर भी इसी तरीके से अभ्यास कर सकें.
स्कूल में पढ़ते हैं 61 बच्चे
स्कूल में 61 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं. यहां के बच्चे पढ़ाई के साथ दूसरी गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं. स्कूल, खंड और जिला स्तर की सांस्कृतिक गतिविधियों, खो-खो, प्रश्नोत्तरी और चित्र देखकर विवरण लिखने जैसी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थी अच्छा प्रदर्शन कर चुके हैं. पवन कुमार करीब 26 साल से शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं और लगभग 10 साल से मिल्क खास स्कूल में कार्यरत हैं. बच्चों को पढ़ाने के उनके तरीके और विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें इस साल राज्य शिक्षक पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है.
समाजसेवा में भी आगे
शिक्षक पवन कुमार बच्चों को पढ़ाने के साथ समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं. उन्होंने वर्ष 2015 में फेरूवाला स्कूल से रक्तदान शिविर की शुरुआत की थी. अब तक वह 16 रक्तदान शिविरों में योगदान दे चुके हैं और खुद भी 15 बार रक्तदान कर चुके हैं. स्काउट एवं गाइड की गतिविधियों के जरिए वह बच्चों को अनुशासन, सेवा और जिम्मेदारी से जुड़ी बातें भी सिखा रहे हैं. उनकी कोशिश यही है कि बच्चे किताबों का ज्ञान लेने के साथ रोजमर्रा की चीजों से सीखें और अच्छे संस्कार भी अपनाएं.