नई दिल्ली | धान की कटाई के बाद अब किसान गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुट गए हैं। ऐसे में सही किस्म का चुनाव और समय पर खाद व खरपतवार नियंत्रण का ध्यान रखना जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही फसल की पैदावार पर असर डाल सकती है। बता दें कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने गेहूं की बुवाई को लेकर किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

इसके मुताबिक, सिंचित खेतों में नवंबर के चौथे सप्ताह तक बुवाई की जा सकती है। वहीं, जिन खेतों में हैप्पी सीडर या सुपर सीडर से पराली का प्रबंधन किया गया है, वहां पूरे पंजाब में पीबीडब्ल्यू 869 किस्म लगाने की सलाह दी गई है।
बुवाई करने की सलाह
PAU ने सिंचित परिस्थितियों के लिए पीबीडब्ल्यू 677, एचडी-3086, उन्नत पीबीडब्ल्यू 343, पीबीडब्ल्यू 1 चपाती, पीबीडब्ल्यू 1 जिंक, पीबीडब्ल्यू जिंक 2, डब्ल्यूएचडी 943 और पीबीडब्ल्यू 291 किस्मों की सिफारिश की है। इसके अलावा उपपर्वतीय जिलों को छोड़कर पूरे पंजाब में डीबीडब्ल्यू 222 की बुवाई की जा सकती है। दक्षिण-पश्चिमी पंजाब के किसानों के लिए पीबीडब्ल्यू 803 की सलाह दी गई है।
खरपतवार रोकने के लिए करें ये काम
बारानी क्षेत्रों में पीबीडब्ल्यू 660 किस्म की बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो चुकी है। वहीं, गेहूं में गुल्ली डंडा खरपतवार को रोकने के लिए बुवाई के दो दिन के भीतर प्री-इमर्जेंस शाकनाशी का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। इसके लिए स्टांप 30 ईसी की 1.5 लीटर, ऑकिरा या मोमिजी 85 डब्ल्यूजी की 60 ग्राम, प्लेटफार्म 385 एसई की 1 लीटर या दक्ष प्लस 48 ईसी की निर्धारित मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल की जा सकती है। छिड़काव के लिए 200 लीटर पानी प्रति एकड़ का उपयोग करें। इनमें से किसी एक विकल्प का ही प्रयोग करें।
डालें इतनी मात्रा
मध्यम उर्वरता वाली सिंचित जमीन में बुवाई के समय प्रति एकड़ 55 किलो डीएपी डालने की सलाह दी गई है। यदि किसान फास्फोरस के लिए 155 किलो सिंगल सुपर फास्फेट का इस्तेमाल करते हैं तो 20 किलो यूरिया खेत की तैयारी के समय या बुवाई से पहले सिंचाई से ठीक पहले डालें। पोटाश की कमी वाली मिट्टी में प्रति एकड़ 20 किलो म्यूरेट ऑफ पोटाश डालने की सलाह है। केंद्र सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,610 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।