हिसार | हरियाणा के हिसार के पुराने बाजारों में आज दिनभर ग्राहकों की भीड़ रहती है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब यहां कारोबार के लिए कुछ घंटे ही तय थे। दुकानों की जगह वकीलों के परिवारों के मकान हुआ करते थे और बाजार की गलियों में घोड़ों की टाप सुनाई देती थी। बता दें कि हिसार का वकीलान बाजार करीब 1940 से आबाद है। आज यह शहर के प्रमुख पुराने व्यापारिक केंद्रों में शामिल है, लेकिन कभी इसका पूरा माहौल अलग हुआ करता था।

दिगंबर जैन समाज के प्रधान नवीन जैन के मुताबिक, उनके दादा अजीत प्रसाद जैन ने वर्ष 1940 में यहां सबसे पहले कपड़े की दुकान खोली थी। नवीन जैन बताते हैं कि पुराने समय में बाजार दोपहर 12 बजे खुलता था और दोपहर 2 बजे तक ही कारोबार होता था।
चांदी के सिक्कों से भुगतान
ग्रेज अधिकारी घोड़ों पर सवार होकर कपड़ा खरीदने आते थे। खरीदारी के बाद वे चांदी के सिक्कों से भुगतान करते थे। उस दौर में बाजार में आज जैसी दुकानों की कतारें और भीड़ नहीं थी। वकीलान बाजार की पुरानी इमारतें भी इसकी खास पहचान थीं। मकानों और दुकानों पर लकड़ी के सुंदर छज्जे बने होते थे। इनसे बाजार की गलियों को अलग रूप मिलता था। हालांकि, आपातकाल के दौरान तत्कालीन बंसीलाल सरकार के समय इन पुराने निर्माणों को तुड़वा दिया गया। इसके बाद बाजार में आधुनिक इमारतें और दुकानें बनने लगीं।
अलग दिखता था बाजार
वकीलान बाजार की पुरानी इमारतें भी इसकी खास पहचान थीं। मकानों और दुकानों पर लकड़ी के सुंदर छज्जे बने होते थे। इनसे बाजार की गलियों को अलग रूप मिलता था। हालांकि, आपातकाल के दौरान तत्कालीन बंसीलाल सरकार के समय इन पुराने निर्माणों को तुड़वा दिया गया। इसके बाद बाजार में आधुनिक इमारतें और दुकानें बनने लगीं। वर्ष 1947 में देश के विभाजन के बाद पाकिस्तान से कई परिवार हिसार आकर बस गए। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कुछ परिवारों ने वकीलान बाजार में पटरी लगाकर छोटे कारोबार शुरू किए। धीरे-धीरे यही कारोबार दुकानों तक पहुंचने लगे और बाजार का विस्तार होता गया।
शाम 6 बजे बंद हो जाते थे दरवाजे
पुराने हिसार में सुरक्षा व्यवस्था के तहत शाम होते ही शहर के चारों दरवाजे बंद कर दिए जाते थे। नवीन जैन के अनुसार, नागोरी गेट, तलाकी गेट, दिल्ली गेट और मोरी गेट शाम 6 बजे बंद हो जाते थे। आज देर रात तक गुलजार रहने वाले शहर की जिंदगी कभी शाम ढलते ही थम जाया करती थी।