नई दिल्ली | नौकरी के दौरान मेडिकल फिटनेस से जुड़े नियमों का पालन करना हर कर्मचारी के लिए जरूरी होता है। खासकर रेलवे में ट्रेन संचालन से जुड़े पदों पर तैनात कर्मचारियों की आंखों की रोशनी और स्वास्थ्य का सीधा संबंध यात्रियों की सुरक्षा से है। ऐसे में रेलवे ने आंखों की LASIK सर्जरी को लेकर नया सख्त निर्देश जारी किया है। बता दें कि कर्मचारी रेलवे की अधिकृत मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के बिना अपनी मर्जी से LASIK सर्जरी नहीं करवा सकेंगे।

अगर कोई कर्मचारी ऐसा करता है और सर्जरी के बाद अपनी मौजूदा मेडिकल श्रेणी में अनफिट हो जाता है, तो उसे चिकित्सकीय रूप से अयोग्य कर्मचारियों को मिलने वाले वैकल्पिक रोजगार और विशेष सेवा लाभ नहीं दिए जाएंगे।
नहीं मिलेंगी सुविधाएं
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, ऐसे कर्मचारियों को अपने अनुरोध पर स्थानांतरित हुआ कर्मचारी माना जाएगा। उनके मामलों का निपटारा भारतीय रेलवे स्थापना नियमावली के वॉल्यूम-1 के पैरा 1311(1) के तहत किया जाएगा। दरअसल, बोर्ड के सामने ऐसे मामले आए थे, जिनमें कर्मचारी बिना अधिकृत मेडिकल सलाह के सर्जरी करवाने के बाद मेडिकल श्रेणी में अनफिट घोषित हो जाते थे। इसके बाद वे वैकल्पिक नौकरी और अन्य सेवा सुविधाओं की मांग करते थे।
भत्तों पर पड़ेगा असर
सामान्य तौर पर मेडिकल डिकैटेगराइजेशन के मामलों में रेलवे स्थापना नियमावली के पैरा 1301, 1307 और 1308 के तहत निर्धारित शर्तों पर वैकल्पिक रोजगार और सेवा संरक्षण के लाभ मिलते हैं लेकिन नए निर्देश के अनुसार, बिना रेलवे मेडिकल अथॉरिटी की सलाह के LASIK सर्जरी कराने वाले कर्मचारी इन विशेष सुविधाओं का दावा नहीं कर सकेंगे। इसमें वैकल्पिक पद, समान वेतन और रनिंग अलाउंस से जुड़े लाभ भी प्रभावित हो सकते हैं।
लागू नहीं होगा नया आदेश
जिन मामलों का पहले ही निपटारा हो चुका है, उन्हें दोबारा नहीं खोला जाएगा। नए निर्देश का उद्देश्य मेडिकल फिटनेस से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना और स्वेच्छा से सर्जरी के बाद विशेष सेवा लाभ लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। ऐसे में रेलवे कर्मचारियों को आंखों की LASIK सर्जरी कराने से पहले अधिकृत रेलवे मेडिकल अथॉरिटी से सलाह लेना जरूरी होगा।