भिवानी | नवंबर 2023 में उदयपुर स्थित हनुमान मंदिर से राष्ट्र कल्याण और धर्म जागरण के उद्देश्य से यात्रा पर निकली श्री बालाजी महाराज की 21 फीट लंबी और लगभग 1001 किलोग्राम वजनी अष्टधातु निर्मित दिव्य गदा भिवानी जिले के लोहारू क्षेत्र में पहुंच चुकी है जहां श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ उसका स्वागत किया. इस आध्यात्मिक यात्रा का नेतृत्व पुजारी सीताराम कृष्ण जी महाराज कर रहे हैं. वे पिछले 28 महीनों से इस गदा के साथ हैं. मंदिरों, गौशालाओं, गांवों और शहरों में जाकर श्रद्धालुओं को इसके दर्शन करवा रहे हैं. सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों, भक्ति, सेवा, त्याग व राष्ट्र प्रेम का संदेश दे रहे हैं.

नारों से गूंज उठा लोहारू
जैसे ही दिव्य गदा पिलानी रोड स्थित लोहारू की गौपाल गौशाला में पहुंची तो श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ सबका जोरदार स्वागत किया. पूरा वातावरण जय श्री राम और जय बजरंगबली के नारों से गूंज उठा. बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बालाजी महाराज की दिव्य गदा की परिक्रमा कर आशीर्वाद प्राप्त किया. यह पावन यात्रा दो दिन तक लोहारू में रहेगी.
पुजारी सीताराम कृष्ण जी ने बताया कि यह आध्यात्मिक यात्रा लगभग 12 सालों तक निरंतर चलेगी. इस यात्रा का समापन भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या में भव्य स्वागत के पश्चात पुनः उदयपुर वापसी के साथ होगा जहां पूर्ण परिक्रमा सम्पन्न की जाएगी.
सनातन धर्म में गदा का महत्व
सनातन धर्म में गदा को शक्ति, साहस और धर्म रक्षा का प्रतीक माना गया है. श्री हनुमान जी की गदा अधर्म और अन्याय के विनाश का प्रतीक है. अष्टधातु से निर्मित यह गदा केवल धातु का स्वरूप नहीं बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है. मान्यता है कि सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास से की गई परिक्रमा तथा धागा बांधकर की गई प्रार्थना का फल एक दिन अवश्य मिलता है.