हिसार | हरियाणा के गांवों में आज भी चूल्हे पर बनी बाजरे की रोटी, चूरमा और देसी खाने का अलग ही स्वाद मिलता है। पुराने समय में मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने और परोसने की परंपरा भी रही है। अब हिसार जिले के राखीगढ़ी गांव में लोगों को हजारों साल पुरानी संस्कृति की झलक दिखाने की तैयारी हो रही है। यहां आने वाले मेहमानों को पारंपरिक अंदाज में भोजन परोसा जाएगा।

19 से 25 अक्टूबर तक आयोजित होने वाले राखीगढ़ी महोत्सव में देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को हरियाणवी और हड़प्पाकालीन खानपान से परिचित कराया जाएगा। इसके लिए प्राचीन शैली के बर्तन तैयार करवाए जा रहे हैं। वहीं, गांव की महिलाएं चूल्हे और हारे पर पारंपरिक व्यंजन बनाएंगी।
बाजरे की रोटी और चूरमे का स्वाद
महोत्सव में खट्टी दाल, मीठे चावल, बाजरे की रोटी, चूरमा, गुड़ के व्यंजन, कचरी की चटनी, बाजरे के लड्डू, खिचड़ी, लस्सी और रायता परोसने की तैयारी है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग हरियाणा के उपनिदेशक नरेंद्र परमार के अनुसार, भोजन को हड़प्पाकालीन शैली के ‘डिश ऑन स्टैंड’ बर्तनों में परोसने की योजना है। हालांकि, सभी प्रस्तावित व्यंजनों के प्राचीन हड़प्पाकालीन होने की पुष्टि नहीं है।
महिलाओं को दिया प्रशिक्षण
जिला पार्षद दिनेश श्योरान के अनुसार, पारंपरिक भोजन बनाने में निपुण स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, हड़प्पाकालीन मुहरों के निर्माण से जुड़े विशेषज्ञ राहुल की मदद से विशेष बर्तन तैयार करवाए जा रहे हैं। बता दें कि महोत्सव में दंगल, ग्रामीण खेल और हरियाणवी सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। राखीगढ़ी भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे बड़े ज्ञात हड़प्पाकालीन स्थलों में शामिल है। यहां प्राचीन बस्तियों, जल निकासी व्यवस्था, आभूषण निर्माण और शिल्प गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं।