चंडीगढ़ | हरियाणा शिक्षा विभाग ने सरकारी अध्यापकों और कर्मचारियों के लिए लोन स्वीकृति प्रकिया में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब मकान निर्माण, मरम्मत या प्लॉट खरीदने के लिए लोन फाइल की मंजूरी जिला शिक्षा अधिकारी या आहरण एवं वितरण अधिकारी (DDO) नहीं देंगे. लोन मंजूरी के लिए फाइल अब सीधे विभागीय मुख्यालय को भेजी जाएगी, जहां से स्वीकृति प्रदान होने पर ही लोन मंजूर होगा.
शिक्षा विभाग ने मकान निर्माण और मरम्मत से संबंधित लोन के लिए आवश्यक दस्तावेजों की विस्तृत चेकलिस्ट जारी कर दी है. इसके अनुसार, लोन के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक कर्मचारी को दो सरकारी नौकरी वाले गारंटर देने होंगे, जिनका प्रोबेशन पीरियड पूरा हो चुका है. तभी लोन फाइल पर विचार किया जाएगा.
इन दस्तावेजों की होगी जरूरत
आवेदन पत्र, DDO से प्रमाणित स्वीकृति, लंबित शिकायत या जांच न होने का प्रमाणपत्र, शपथ पत्र, पे- स्लिप, जीपीएफ/ पीआरएएन नंबर, नक्शा और अनुमान विवरण, मोर्टगेज डीड, पहले लिए गए ऋण का ब्योरा, 2 स्थायी कर्मचारियों से सत्यापित श्योरिटी बॉन्ड, गवाह कर्मचारियों के पहचान पत्र, विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी दस्तावेज में कमी पाई गई, तो आवेदन स्वतः अमान्य माना जाएगा.
लोन की सीमा और शर्तें
- नया मकान निर्माण: बेसिक वेतन का 34 गुना या अधिकतम 25 लाख रुपए (जो भी कम हो).
- मरम्मत या बढ़ोतरी: बेसिक वेतन का 10 गुना या अधिकतम 2 लाख रुपए
- प्लॉट खरीद: नियमों के अनुसार, तय सीमा तक अग्रिम राशि. यह सुविधा केवल नियमित सेवा पर तैनात राज्य के सरकारी शिक्षक और शैक्षिक कर्मचारियों को उपलब्ध होगी.
मुख्यालय स्तर पर बढ़ेगी निगरानी
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस बदलाव का उद्देश्य लोन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और जिला स्तर पर होने वाली देरी या अनियमितताओं को रोकना है. अब सभी फाइलें मुख्यालय से स्वीकृत होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों को लोन की राशि जारी की जाएगी.
