फरीदाबाद | हरियाणा के अरावली सहित पूरे राज्य भर में आज भी सालों पुराने ऐसे ऐतिहासिक स्थल है, जो अपनी विशिष्ट पहचान के चलते पर्यटकों के बीच जगह बनाएं हुए हैं. कुछ ऐसी ही स्पेशल पहचान फरीदाबाद स्थित सूरजकुंड की है, जिसकी सूरज की सुनहरी किरणों जैसी खुबसूरती के चलते आज भी गर्व से इसका नाम लिया जाता है. अरावली पहाड़ियों की गोद में छिपा यह कुंड 10वीं सदी की गहराई और कहानी के कारण भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है.
सूर्य के आकार का जलाशय
इतिहास के झरोखे में झांकें तो पता चलता है कि दसवीं शताब्दी में राजा सूरजपाल दिल्ली और उत्तर भारत के कई हिस्सों पर राज करते थे. वो सूर्य भगवान के परम भक्त थे तो उन्होंने यहां सूर्य के आकार का एक विशाल जलाशय बनवाया था जिसकी आज सूरजकुंड के नाम से देश- दुनिया में पहचान है.
बताया जाता है कि पूजा- अर्चना से पहले पहले राजा सूरजपाल इस कुंड में स्नान करते थे और यह विश्वास करते थे कि यहां का पानी चर्म रोग और गंभीर कुष्ठ रोग तक को ठीक करने की शक्ति रखता है. हालांकि, इसी जलाशय के पास उन्होंने सूर्य देव के भव्य मंदिर का निर्माण भी करवाया था लेकिन आज मंदिर खंडर में तब्दील हो चुका है.
करीब 6 एकड़ जमीन पर फैले इस कुंड की चौड़ाई करीब 130 मीटर है. इसका अर्धगोलाकार तटबंध ऐसा है कि इसे देखने पर उगते हुए सूर्य का आभास होता है. चारों ओर पत्थरों की बनी सीढ़ियां और बीच में खुला मैदान इसकी विशालता को और बढ़ाता है. मैदान के एक हिस्से में एक मंच जैसा ढांचा भी है, जहां माना जाता है कि राजा पूजा- अर्चना के साथ- साथ जनता के साथ बैठकर अहम फैसले लिया करते थे. ब्रिटिश शासन के समय इस स्थान का इस्तेमाल पिकनिक स्पॉट के रूप में भी किया गया था.
एंट्री के लिए लगती है टिकट
आज भले ही कुंड का पानी सुख चुका है और जगह- जगह घांस- फूस उग आई है, लेकिन इसकी लोकप्रियता और ऐतिहासिक महत्व में कोई कमी नहीं आई है. यहां आने वाले घरेलू पर्यटकों को एंट्री के लिए 25 रूपए टिकट और विदेशी टूरिस्ट को 300 रुपए टिकट का भुगतान करना पड़ता है. इस स्थल की देखरेख पुरातत्व विभाग द्वारा की जाती है, इसलिए सफाई और रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाता है.
