झज्जर | जंतर- मंतर पर CJP प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से आंख की रोशनी गंवाने वाले साहिल लोहचब मूल रूप से झज्जर के भूपनियां गांव के रहने वाले हैं. करीब 10 साल पहले उनका परिवार दिल्ली के नजफगढ़ में किराए के मकान में रहने लगा था. साहिल के पिता दीपक पोलियो की वजह से दिव्यांग हैं. परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण साहिल ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ काम करना शुरू कर दिया था.

साहिल ने काम के साथ पढ़ाई जारी रखने के लिए DU में ग्रेजुएशन में एडमिशन लिया था. वह प्राइवेट टैक्सी चलाकर परिवार के खर्च में मदद करते थे. साथ ही, दिल्ली पुलिस में भर्ती होने की तैयारी कर रहे थे.
सीखी ड्राइविंग
साहिल के मुताबिक, उनके पिता कभी- कभी प्राइवेट टैक्सी चलाते हैं और परिवार की आय का मुख्य सहारा टैक्सी ड्राइविंग ही है. इसी वजह से उन्होंने भी टैक्सी चलाना शुरू किया. उनका कहना है कि करीब 10-12 साल की उम्र में ही उन्होंने ड्राइविंग सीख ली थी. साहिल ने बताया कि उनके दो छोटे भाई छठी और नौवीं कक्षा में पढ़ते हैं. टैक्सी से होने वाली कमाई का इस्तेमाल पढ़ाई और घर के खर्च में होता था. इसी दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस की परीक्षा की तैयारी शुरू की.
गई आंख की रोशनी
साहिल का दावा है कि CJP के प्रोटेस्ट के दौरान पैरामिलिट्री फोर्स की ओर से पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया. इसी दौरान उनकी एक आंख और चेहरे पर पैलेट के छर्रे लगे. उनकी एक आंख की रोशनी चली गई, जबकि चेहरे पर भी छर्रों के निशान रह गए. उन्होंने बताया कि घटना के बाद दिल्ली AIIMS में उनका इलाज चला. इसी दौरान राहुल गांधी की टीम से संपर्क हुआ. साहिल के मुताबिक, टीम ने इलाज में मदद की और परिवार का भी सहयोग किया. राहुल गांधी से उनकी दो बार मुलाकात हो चुकी है.
पुलिस पर आरोप
साहिल का दावा है कि इलाज के बाद कार्रवाई के लिए उन्होंने कनॉट प्लेस और संसद मार्ग थाने में कई बार संपर्क किया, लेकिन उनकी FIR दर्ज नहीं की गई. शुक्रवार को राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने पहुंचने के करीब छह घंटे बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया. साहिल के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान अचानक उनके दाहिने हिस्से, छाती, बाजू और आंख पर कुछ लगा. उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो नीली ड्रेस पहने एक व्यक्ति के हाथ में बड़ी बंदूक थी. इसके बाद आंख, चेहरे, हाथ और छाती से खून निकलने लगा और दाहिनी आंख से दिखाई देना बंद हो गया. उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल, फिर सफदरजंग और बाद में AIIMS ले जाया गया.
2025 में दिल्ली पुलिस भर्ती में धांधली के आरोपों को लेकर वह CJP के प्रदर्शन में शामिल हुए थे. उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस में जाने का उनका सपना था, लेकिन आंख की रोशनी जाने के बाद अब सब कुछ खत्म जैसा लग रहा है.