जींद | हरियाणा के जींद जिले के संगतपुरा गांव की शूटर नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में ट्रैप शूटिंग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया है. इस जीत के साथ भारत के खाते में प्रतियोगिता का पांचवां गोल्ड मेडल आया. नीरू की सफलता की खबर मिलते ही उनके परिवार और गांव में खुशी का माहौल बन गया. परिवार को फोन और सोशल मीडिया के जरिए बधाइयां मिल रही हैं. नीरू की इस उपलब्धि के पीछे कई वर्षों की तैयारी है.
किसान परिवार से आने वाली नीरू ने सीमित संसाधनों के बावजूद शूटिंग को आगे बढ़ाने का फैसला किया और लगातार अभ्यास के जरिए राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक अपनी जगह बनाई.
शूटिंग पर लगाया पूरा ध्यान
नीरू ने वर्ष 2019 में 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी. इसके बाद उन्होंने अपने खेल पर पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया. लगातार अभ्यास करते हुए वह निशानेबाजी में आगे बढ़ती गईं और अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक तक पहुंची हैं. नीरू की मां के अनुसार, परिवार में दो बेटियां और एक बेटा है. नीरू ने शुरुआत से ही खेल में आगे बढ़ने के लिए कड़ी मेहनत की और परिवार ने भी उनके फैसले का समर्थन किया. परिवार के मुताबिक, नीरू मध्य प्रदेश की स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से खेल रही थीं. खेल के दौरान उन्हें सरकार की ओर से भी सहयोग मिला.
गांव लौटने पर चूरमे से होगा स्वागत
गोल्ड मेडल जीतने के बाद अब संगतपुरा गांव में नीरू के लौटने का इंतजार किया जा रहा है. परिवार और ग्रामीण उनके स्वागत की तैयारी में जुट गए हैं. नीरू की मां ने बताया कि बेटी के घर पहुंचने पर उसके लिए चूरमा बनाया जाएगा और पारंपरिक तरीके से स्वागत होगा. परिवार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि नीरू ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पदक जीतकर अपने गांव की पहचान बढ़ाई है.
VIDEO | Jind: Celebrations erupt at Neeru Dhanda’s home in Jind after historic Asian Games gold. pic.twitter.com/hQgPeam5yg
— Press Trust of India (@PTI_News) September 29, 2026
अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
नीरू की उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र में खेलों को करियर के रूप में देखने वाली बेटियों के लिए एक उदाहरण बनकर सामने आई है. उनकी यात्रा में परिवार का सहयोग और लगातार अभ्यास महत्वपूर्ण रहा है. संगतपुरा के किसान परिवार से निकलकर एशियन गेम्स में ट्रैप शूटिंग का गोल्ड जीतने तक नीरू ने अपने लक्ष्य पर लगातार काम किया. अब गांव के लोग अपनी गोल्ड मेडल विजेता बेटी के घर लौटने और उसका स्वागत करने का इंतजार कर रहे हैं.
