पंचकूला | कहते हैं कि मजबूत इरादों वाले इंसान के सामने तमाम बड़ी से बड़ी चुनौतियां भी घुटने टेक देती हैं. अगर इंसान का हौसला बुलंद हो तो वह बड़ी से बड़ी बाधाओं को आसानी से पार कर लेता है. पंचकूला के रहने वाली लेफ्टिनेंट इनायत वत्स (Lt. Inayat Vats) ने ऐसा ही कुछ कर दिखाया है. महज 3 साल की नन्ही सी उम्र में उन्होंने अपने पिता मेजर नवनीत वत्स को दिया. उसके बाद, उन्होंने भारतीय सेना में शामिल होने की ढानी और अपनी कड़ी लगन और मेहनत के बलबूते पिता की वर्दी पहनने का सपना साकार कर दिया.
सेना को दी पहली प्राथमिकता
दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्री राम कॉलेज से ग्रेजुएट और हिंदू कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएट करने के बात इनायत चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी में शामिल हुई. हरियाणा सरकार द्वारा उन्हें गजेटेड पद देने की भी पेशकश की गई थी, लेकिन उन्होंने सेना को ही पहली प्राथमिकता दी. इनायत अब भारतीय सेना में अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं. एक समय ऐसा आया था, जब छोटी सी उम्र में साल 2003 में एक कश्मीर में हुए आतंकवादी विरोधी अभियान के दौरान उनके पिता शहीद हो गए थे. उन्हें मरणोपरांत सेना पदक से भी सम्मानित किया गया था.
परिवार में रही सेना की परंपरा
इनायत के दादा भी सेना में कर्नल के पद पर तैनात रहे थे. छोटी सी उम्र में पिता को खो देने के बाद इनायत ने अपने पिता और दादा की परंपरा को निभाने की ठानी. बेटी इनायत की उपलब्धि पर मां शिवानी को भी गर्व है. वह आर्मी पब्लिक स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं. उन्होंने कहा कि सबको यही लगता था कि वह कोई अन्य सरकारी नौकरी चुनेगी, लेकिन इनायत ने सभी विकल्पों को त्याग कर सेना को ही चुना. यह उसके खून में ही है.
