सिरसा | सावन के पावन महीने में हरियाणा की एक अनोखी नंदी कांवड़ इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. भगवान शिव के वाहन माने जाने वाले नंदी के साथ निकाली जा रही यह कांवड़ यात्रा जहां- जहां से गुजर रही है, वहां लोग रुककर इसके दर्शन कर रहे हैं. श्रद्धालुओं ने हरिद्वार से गंगाजल भरकर नंदी की पीठ पर रखा है और उसी के साथ पैदल अपने गांव लौट रहे हैं. सिरसा जिले की कालांवाली मंडी के नौ कांवड़ियों की टोली इस बार अपने गांव के नंदी को भी हरिद्वार लेकर गई.

वहां विधि- विधान से गंगाजी में स्नान कराने के बाद नंदी की पीठ पर गंगाजल रखा गया और फिर सभी श्रद्धालु पैदल यात्रा करते हुए वापस लौट रहे हैं. शिवरात्रि के दिन गांव पहुंचकर इसी गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा.
सावन में अनोखी मिसाल
कांवड़ियों ने बताया कि वे हर साल हरिद्वार से कांवड़ लाते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने गांव के नंदी को भी इस धार्मिक यात्रा का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया. हरिद्वार पहुंचने पर नंदी की विशेष पूजा की गई और गंगा स्नान भी कराया गया. पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के साथ एक कार भी चल रही है, जिसमें नंदी के लिए चारा, दाना और अन्य जरूरी सामान रखा गया है. नंदी की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है और यात्रा के दौरान उसकी देखभाल में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही.
400 KM की यात्रा
रोशन लाल ने बताया कि गांव से हरिद्वार की दूरी करीब 400 किलोमीटर है. वे करीब 10 दिन पहले नंदी को वाहन से हरिद्वार लेकर पहुंचे थे. वहां से गंगाजल लेकर अब तक लगभग 200 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कर चुके हैं. रात में वे कांवड़ शिविरों में रुकते हैं, जहां नंदी को बांधकर उसे आटा, दलिया और चारा खिलाया जाता है. कई शिविरों के संचालक भी नंदी के भोजन की व्यवस्था स्वयं कर देते हैं. कांवड़िये सुबह सूर्योदय से पहले यात्रा शुरू करते हैं और दोपहर की तेज गर्मी में विश्राम करते हैं.
उनका कहना है कि नंदी का स्वभाव बेहद शांत है और वह पूरी यात्रा में बिना किसी परेशानी के साथ चल रहा है. यात्रा पूरी होने के बाद नंदी को फिर गांव के मंदिर में रखा जाएगा, जहां शिवरात्रि पर गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक किया जाएगा. इस अनोखी कांवड़ यात्रा को लेकर पूरे गांव में उत्साह का माहौल है.