सिरसा | हरियाणा के सिरसा जिले में जन्मे जुड़वां भाई रोहताश और रघुवीर की कहानी हर किसी को हैरान कर देती है. दोनों भाई एक ही दिन रिटायर हुए, जबकि इससे पहले उन्होंने साथ पढ़ाई की और शिक्षा विभाग में भी करीब-करीब एक साथ नौकरी शुरू की थी. करीब 32 साल तक सेवाएं देने के बाद जब रिटायरमेंट का वक्त आया, तो दोनों भाई भावुक नजर आए. इस खास मौके पर दोनों के स्कूलों में अलग-अलग विदाई समारोह रखे गए, जहां साथी शिक्षकों ने उन्हें उपहार भेंट किए और गांव वालों ने फूल- मालाएं पहनाकर सम्मान दिया.

दोनों भाइयों का विवाह सगी बहनों से हुआ है. बचपन में दोनों की शक्ल इतनी मिलती-जुलती थी कि गांव वाले भी अक्सर पहचानने में गच्चा खा जाते थे. रघुवीर और रोहताश का जन्म 9 जुलाई 1968 को नाथूसरी कलां गांव में हुआ था.
सिरसा का रोहताश और रघुवीर
शुरुआती सालों में ग्रामीण चेहरा देखकर यह तक नहीं बता पाते थे कि सामने रोहताश खड़ा है या रघुवीर. परिवार वालों ने दोनों का दाखिला भी एक ही स्कूल में करवाया था. नाथूसरी चौपटा के राजकीय स्कूल से दसवीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों ने राजकीय नेशनल कॉलेज सिरसा से बीए और हिसार के साधु राम कॉलेज से एक साथ बीएड की डिग्री हासिल की. यहां तक कि दोनों की शादी भी एक ही समय पर हुई और आज भी दोनों भाई गांव में साथ ही रहते हैं. रघुवीर की पत्नी संतोष गृहिणी हैं और उनके एक बेटा- बेटी हैं.
32 वर्षीय बेटा विजय पहले विजिलेंस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन करीब चार साल बाद उसने यह सरकारी नौकरी छोड़कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी है. बेटी मोनिका एमए पास हैं और उनकी शादी हो चुकी है. रोहताश की पत्नी भी गृहिणी हैं और उनके भी एक बेटा- बेटी हैं. 36 वर्षीय बेटा संजय कुमार सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत हैं, जबकि बेटी ममता भी एमए पास होकर विवाहित जीवन जी रही हैं.
दोनों का करियर
करियर की बात करें तो रोहताश ने 28 जुलाई 1994 को चौपटा के राजकीय स्कूल में गणित शिक्षक के तौर पर नौकरी शुरू की थी और बाद में तरकांवाली व शक्करमंदोरी के स्कूलों में भी पढ़ाया. साल 2021 में उन्हें हेडमास्टर पद पर प्रमोशन मिला, जिसके बाद उनका तबादला रूपाणा बिश्नोइयां के स्कूल में हुआ. वहीं, रघुवीर ने एक साल बाद यानी 16 अगस्त 1995 को लुदेसर गांव के स्कूल में गणित शिक्षक के रूप में कार्यभार संभाला था. यहां 6 साल सेवाएं देने के बाद वे शाहपुरिया गांव के स्कूल में करीब 20 साल तक पढ़ाते रहे. उन्हें भी 2021 में हेडमास्टर बनाया गया, जिसके बाद उन्होंने रामपुरा ढिल्लो और तरकांवाली के स्कूलों में सेवाएं दीं.
कई उपलब्धियां कीं हासिल
आखिरकार रघुवीर शहीद कृष्ण कुमार राजकीय माध्यमिक विद्यालय, तरकांवाली से और रोहताश राजकीय माध्यमिक विद्यालय, रूपाणा बिश्नोइयां से करीब 32 साल की लंबी सेवा के बाद रिटायर हुए, जिस पर दोनों स्कूलों के स्टाफ और गांव वालों ने मिलकर उन्हें विदाई दी. ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर सतबीर सिंह ने बताया कि दोनों शिक्षकों के कार्यकाल के दौरान स्कूलों ने कई उपलब्धियां हासिल कीं. पिछले सत्र में विभाग के इंस्पायर मानक अवॉर्ड के लिए दो छात्रों का चयन हुआ था, जिन्हें 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई.
अक्सर लोग करते मजाक
रघुवीर ने बताया कि जुड़वां होने की वजह से लोगों को अक्सर पहचानने में परेशानी होती थी. स्कूल में ड्यूटी के दौरान भी कई बार लोग असमंजस में पड़ जाते थे कि सामने रघुवीर है या रोहताश और अगर वे तुरंत जवाब न दें तो लोग मजाक में पूछ बैठते थे कि आज दूसरा भाई तो ड्यूटी पर नहीं आ गया. शादी- ब्याह और पारिवारिक कार्यक्रमों में भी रिश्तेदार दोनों को अलग- अलग खड़ा कर देते थे ताकि लोग आसानी से पहचान सकें क्योंकि बचपन से ही दोनों की शक्ल इतनी मिलती थी कि पहचानना किसी के लिए भी आसान नहीं था.