महेंद्रगढ़ | आज इस खबर में हम आपको हरियाणा परिवहन विभाग के एक रोचक किस्से से रूबरू कराएंगे, जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे. जी हां, हम यहां हरियाणा प्रदेश के सबसे पुराने जिलों में शुमार महेंद्रगढ़ की बात कर रहे हैं जो परिवहन व्यवस्था के मामले में आज भी ‘अनाथ’ जैसी स्थिति में बना हुआ है. खास बात यह है कि महेंद्रगढ़ बस स्टैंड से रोजाना लगभग 350 बसों की आवाजाही होती है लेकिन विडंबना है कि इनमें से सभी बसें दूसरे डिपो की हैं.

यहां की पूरी परिवहन व्यवस्था नारनौल, रेवाड़ी और चरखी दादरी डिपो के अधिकारियों की मेहरबानी पर टिकी है. स्थिति यह है कि यात्रियों को यह तक पता नहीं होता कि कौन सी बस कब बंद हो जाएगी और कब चलेगी. लोकल रूटों पर यह समस्या और भी ज्यादा है.
खड़े होकर सफर करने को मजबूर
प्रदेश की राजधानी चंडीगढ़ जैसे महत्वपूर्ण मार्ग के लिए 9 बसें उपलब्ध तो हैं, लेकिन वे सभी नारनौल से आती हैं. अधिकतर समय वे भरी होने के कारण महेंद्रगढ़ के यात्रियों को खड़े होकर यात्रा करनी पड़ती है. दिल्ली के लिए मात्र 3 और खाटूश्याम के लिए केवल एक बस सतनाली से संचालित है. जब ये डिपो अपनी बसें अचानक बंद कर देते हैं या समय में बदलाव करते हैं तो महेंद्रगढ़ के यात्रियों को घंटों बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ता है.
महेंद्रगढ़ बस स्टैंड पूरी तरह से बाहरी डिपो के भरोसे संचालित हो रहा है. यहां की सबसे अधिक निर्भरता नारनौल डिपो पर है. उसके बाद चरखी दादरी और रेवाड़ी का नंबर आता है. भिवानी, हिसार, फरीदाबाद, गुरुग्राम और कुरुक्षेत्र जैसे शहरों से नाममात्र बसें ही यहां पहुंचती है.
लंबी दूरी व धार्मिक स्थलों के लिए चाहिए बसें
महेंद्रगढ़ से केवल लोकल ही नहीं, बल्कि लंबी दूरी की बसों की भी भारी कमी है. यात्रियों की मांग है कि महेंद्रगढ़ से चंडीगढ़ के लिए रात्रि सेवा शुरू की जाए. इसके अलावा आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हरिद्वार, ऋषिकेश, मुरादाबाद, पुष्कर, सालासर, खाटूधाम और सीकर जैसे धार्मिक व व्यापारिक केंद्रों के लिए कम से कम एक-एक प्रतिदिन सीधी बस सेवा होनी चाहिए. पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू- कटरा, UP और उत्तराखंड के मुख्य शहरों के लिए भी बसों का संचालन समय की मांग है.
नए रूट और विस्तार की डिमांड
यात्रियों का कहना है कि दक्षिणी हरियाणा के लोगों की अधिकांश रिश्तेदारियां राजस्थान में सीमा के साथ लगते जिलों व क्षेत्रों से हैं. विस्तार के लिए दुलोठ रूट की बसों को राजस्थान के बुहाना, चिड़ावा, झुंझुनूं और बीकानेर तक तथा सतनाली रूट को पिलानी व राजगढ़ तक बढ़ाया जाना चाहिए.
महेंद्रगढ़ से कुंड, अलवर, नीमराणा, बहरोड़, भरतपुर तथा महेंद्रगढ़ से सीधे कोरियावास मेडिकल कॉलेज और कुंड एम्स तक विशेष बसें चलाई जाएं. महेंद्रगढ़ से वाया भोजावास- मंदोला- डहीना, वाया रसूलपुर- गुढ़ा- कनीना और वाया गागड़वास- बचीनी- कोका- रामबास जैसे महत्वपूर्ण ग्रामीण रास्तों पर नई बसें शुरू करने की आवश्यकता है.
स्वतंत्र अस्तित्व बड़ी समस्या
महेंद्रगढ़ बस स्टैंड का अपना स्वतंत्र अस्तित्व न होना यहां के यात्रियों के लिए सबसे बड़ी समस्या है. जब तक महेंद्रगढ़ में बनकर खड़े सब- डिपो को पूर्ण डिपो का दर्जा देकर शुरू नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों को इसी तरह अनिश्चितता और असुविधा के साए में सफर करना पड़ेगा. प्रशासन और सरकार को चाहिए कि वे जिले के इस पुराने केंद्र की परिवहन समस्याओं को गंभीरता से लें और नए रूटों को जल्द अमलीजामा पहनाएं.