चंडीगढ़ | हरियाणा में किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. प्रदेश सरकार ने खाद्यान उत्पादन 3 साल में 2% यानि 5 लाख टन बढ़ाने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड की तर्ज पर जल स्वास्थ्य कार्ड योजना तैयार की गई है. इसमें सभी करीब 8 लाख ट्यूबवेलों के पानी की जांच होगी. इसकी रिपोर्ट के आधार पर फसलें उगाने की सिफारिश की जाएगी. इसके लिए कमेटी का गठन होगा, जिसमे कृषि विभाग, हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार, केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल के वैज्ञानिक शामिल होंगे.

मोबाइल फोन पर मिलेगी रिपोर्ट
- ट्यूबवेलों से पानी के सैंपल लेकर जांच की जाएगी.
- सैंपल को GPS लोकेशन से जोड़ा जाएगा.
- जांच रिपोर्ट जल स्वास्थ्य कार्ड में दर्ज की जाएगी.
- जांच रिपोर्ट किसानों के मोबाइल फोन पर भेजी जाएगी.
- जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी के अनुसार फसल उगाने व उसमें पोषक तत्व डालने की सलाह दी जाएगी ताकि उत्पादन में बढ़ोतरी हो सकें.
पानी की जांच के होंगे 9 पैरामीटर
पानी की जांच के 9 पैरामीटर होंगे. इनमें विद्युत चालकता, अमलता/क्षारीयता, कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट, कैल्शियम मैग्नीशियम, अवशिष्ट सोडियम कार्बोनेट, सोडियम, क्लोराइड, सल्फेट की मात्रा शामिल है. कार्ड में किसान का विवरण, पानी के सैंपल की तारीख, लोकेशन, कुएं/ बोरिंग की गहराई, भू-जलस्तर, मिट्टी की संरचना, जल परीक्षण रिपोर्ट होगी.
भूजल का बनेगा मानचित्र
कृषि विभाग के महानिदेशक राज नारायण कौशिक के अनुसार, भू- जल का पूरा मानचित्र बनेगा. किसान मानचित्र देखकर जान सकेंगे कि किस इलाके में कैसा पानी है और इससे किस तरह की फसलें उगाई जा सकती हैं. हरियाणा में करीब 60% किसान ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करते हैं. ट्यूबवेल के पानी में हैवी साल्ट आ रहे हैं. इससे जमीन की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है. अभी किसान अपने हिसाब से खेती कर रहे हैं.
नई योजना की खासियत
जल स्वास्थ्य कार्ड से पानी के प्रमुख तत्वों की जानकारी मिल सकेगी. इसमें कौन-कौन सी फसल ज्यादा पैदावार दे सकती हैं, भू- जल में क्या मिलाकर बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है, इसके लिए सिफारिश भी की जाएगी. पानी के हिसाब से फसलें उगाएंगे तो उत्पादन अच्छा होगा. लागत कम आएगी. खाद- बीज कम लगेगा. पानी खराब है तो जिप्सम डालकर ठीक हो सकता है. इससे धरती की सेहत सही रहेगी.