चंडीगढ़ | हरियाणा सरकार NCR के पुनर्गठन की तैयारी में है. 16 जून को होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की बैठक में रीजनल प्लान- 2041 के तहत NCR क्षेत्र को नए सिरे से तय करने का प्रस्ताव रखा जाएगा. इस प्रस्ताव के लागू होने पर NCR की मौजूदा सीमा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. प्रस्ताव के अनुसार, दिल्ली से 100 किलोमीटर के दायरे के आधार पर NCR की तस्वीर बदली जा सकती है. कई जिले इस नई सीमा से बाहर हो सकते हैं. इनमें महेंद्रगढ़, भिवानी, चरखी दादरी, जींद और करनाल जैसे जिले सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है. इन जिलों के कई हिस्से प्रस्तावित 100 किलोमीटर सीमा से बाहर बताए जा रहे हैं.

कुछ जिले NCR के तय मानकों में फिट नहीं बैठते क्योंकि उनकी दूरी दिल्ली से 100 किलोमीटर से अधिक है. रीजनल प्लान- 2041 के मसौदे में सुझाव दिया गया है कि NCR की सीमा को दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित किया जाए. फिलहाल, हरियाणा के 14 जिले किसी न किसी रूप में NCR का हिस्सा हैं.
विकास केंद्र बनाने की योजना
हरियाणा सरकार कुंडली- मानेसर- पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे के आसपास के 135 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को NCR का सबसे बड़ा विकास केंद्र बनाने की योजना पर काम कर रही है. इस 16 जून की बैठक में रीजनल प्लान- 2041 का ड्राफ्ट पेश किया जाएगा. योजना के तहत, KMP और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के आसपास 5 किलोमीटर तक के क्षेत्र को ‘सेंट्रल NCR’ घोषित करने का प्रस्ताव है जिसे ‘गोल्डन रिंग ऑफ अपॉर्च्युनिटी’ के रूप में विकसित किया जा सकता है.
दिया गया यह सुझाव
सरकार ने 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक- एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर NCR में बनाए रखने का सुझाव भी दिया है. अगर यह पुनर्गठन लागू होता है तो इसका असर NCR टैग, इंफ्रास्ट्रक्चर फंडिंग, औद्योगिक निवेश, रियल एस्टेट और परिवहन सेक्टर पर भी देखने को मिलेगा. इसके अलावा, ‘पंचग्राम’ परियोजना के तहत 5 नए ग्रीनफील्ड शहर बसाने की भी योजना है. करीब 2.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में औद्योगिक नगर, आवासीय टाउनशिप और आधुनिक शहरी केंद्र विकसित किए जाएंगे. एक्सप्रेसवे के दोनों ओर 2 से 6 किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है.