नई दिल्ली | जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण का असर अब केवल दिन के तापमान तक सीमित नहीं रह गया है. भारतीय शहरों में रातें भी लगातार गर्म होती जा रही हैं और यह स्थिति अब सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है. शहरों में रात का तापमान दिनों की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिल रही और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. हालिया अध्ययन के अनुसार, कंक्रीट के बढ़ते जंगल, लगातार घटते हरित क्षेत्र और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव इसकी बड़ी वजह हैं.

शहर दिनभर सूरज की गर्मी को अपने भीतर सोख लेते हैं और रात में धीरे- धीरे उसे छोड़ते रहते हैं. इसी कारण रात के समय भी तापमान सामान्य से अधिक बना रहता है और लोगों की नींद प्रभावित होती है.
भारतीय शहरों में बढ़ा नाइट हीट स्ट्रेस
अध्ययन में वर्ष 2012 से 2022 के बीच कई बड़े भारतीय शहरों में बेहद गर्म रातों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. सबसे अधिक असर अहमदाबाद में देखा गया जहां 15 अतिरिक्त गर्म रातें रिकॉर्ड की गईं. इसके बाद, मुंबई में 11, बेंगलुरु में 8, जयपुर में 7, दिल्ली में 6 और चेन्नई में 4 अतिरिक्त गर्म रातें दर्ज हुईं. रात के समय तापमान बढ़ने से शरीर को दिनभर की गर्मी से उबरने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता.
रिपोर्ट में दिल्ली को उन शहरों में शामिल किया गया है, जहां रात के समय शहरी तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक पाया गया. वहीं, राजधानी में नाइट अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव की तीव्रता 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक दर्ज की गई. घनी आबादी वाले इलाकों में खुले स्थानों और हरित क्षेत्रों की कमी इस समस्या को और गंभीर बना रही है.
नींद की गुणवत्ता पर असर
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, रात में अधिक तापमान रहने से शरीर की प्राकृतिक शीतलन प्रक्रिया बाधित होती है. इसका सीधा असर नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है. लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारियां, थकान और अन्य स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं. बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग इसके सबसे अधिक प्रभावित वर्ग माने जा रहे हैं. बढ़ती गर्म रातों का असर बिजली की मांग पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
एयर कंडीशनर और अन्य शीतलन उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से बिजली की खपत लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है. यदि शहरों में हरित क्षेत्रों का संरक्षण, बेहतर शहरी नियोजन और प्राकृतिक वेंटिलेशन को बढ़ावा नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं.