नई दिल्ली | जम्मू- कश्मीर की त्रिकूट पहाड़ियों पर करीब 5200 फीट की ऊंचाई पर स्थित माता वैष्णो देवी का मंदिर भारत के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में गिना जाता है. हर साल करोड़ों श्रद्धालु यहां माता रानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में माता महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती के स्वरूप में तीन प्राकृतिक पिंडियों की पूजा की जाती है. हालांकि मंदिर की महिमा से तो अधिकांश लोग परिचित हैं, लेकिन इसकी खोज से जुड़ी पौराणिक कथा बहुत कम लोगों को पता है. मान्यता के अनुसार, करीब 700 वर्ष पहले इस पवित्र गुफा की खोज पंडित श्रीधर ने की थी.

कथा के मुताबिक, पंडित श्रीधर एक गरीब लेकिन माता के परम भक्त थे. एक बार उनके घर पर विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें स्वयं माता वैष्णो देवी एक कन्या के रूप में पहुंचीं और आयोजन में सहयोग किया. इसी दौरान भैरव नाथ वहां पहुंच गया. उससे बचने के लिए माता भंडारे के बीच से ही वहां से चली गईं.
वैष्णो देवी की गुफा
माता के अचानक चले जाने से पंडित श्रीधर बेहद दुखी हो गए. उन्हें लगा कि उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य उनसे छिन गया है. उन्होंने भोजन और पानी तक का त्याग कर दिया और एकांत में बैठकर माता से दोबारा दर्शन देने की प्रार्थना करने लगे. कथा के अनुसार, उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता वैष्णो देवी सपने में प्रकट हुईं. उन्होंने पंडित श्रीधर को त्रिकूट पर्वत की घाटियों में स्थित अपनी पवित्र गुफा खोजने का आदेश दिया. साथ ही गुफा तक पहुंचने का मार्ग भी बताया और व्रत समाप्त करने के लिए कहा.
रोचक तथ्य
पंडित श्रीधर गुफा की तलाश में निकल पड़े. कहा जाता है कि जब भी उन्हें रास्ता भटकने का एहसास होता, माता सपने में आकर उनका मार्गदर्शन करतीं. आखिरकार वे उस पवित्र गुफा तक पहुंच गए. गुफा में प्रवेश करते ही पंडित श्रीधर ने एक चट्टान पर तीन प्राकृतिक पिंडियां देखीं. उसी समय माता वैष्णो देवी अपने दिव्य स्वरूप में उनके सामने प्रकट हुईं और उन्हें तीनों पिंडियों तथा गुफा में मौजूद अन्य पवित्र चिह्नों का महत्व बताया. माता ने उन्हें चार पुत्रों का वरदान दिया और इस पवित्र धाम में पूजा-अर्चना करने का अधिकार भी प्रदान किया.
माता ने पंडित श्रीधर को इस तीर्थ की महिमा जन- जन तक पहुंचाने का आशीर्वाद दिया. मान्यता है कि उन्होंने अपना शेष जीवन इसी पवित्र गुफा में माता की सेवा और आराधना में बिताया. तभी से यह धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है.