ज्योतिष डेस्क | 27 जुलाई से शनि देव मीन राशि में वक्री होने जा रहे हैं. ज्योतिष शास्त्र में शनि की वक्री चाल को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है. इस दौरान कई लोग विशेष पूजा-पाठ और उपाय करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शनि वक्री की अवधि में कुछ वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है. माना जाता है कि इन चीजों को घर लाने से आर्थिक परेशानियां, करियर में रुकावट और पारिवारिक तनाव जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं.

ज्योतिष शास्त्र में लोहा शनि देव की धातु माना गया है. मान्यता है कि शनि के वक्री रहने के दौरान लोहे का सामान खरीदने से आर्थिक नुकसान और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं. इसलिए इस अवधि में लोहे से बनी वस्तुएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है.
27 जुलाई को शनि देव होंगे वक्री
शनि देव की पूजा में सरसों के तेल का विशेष महत्व होता है. इसी कारण धार्मिक मान्यता है कि शनि वक्री के दौरान सरसों का तेल खरीदकर घर नहीं लाना चाहिए. ऐसा करने से कर्ज बढ़ने या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. मान्यता है कि शनि की वक्री अवधि में नमक खरीदना भी शुभ नहीं माना जाता. कहा जाता है कि इससे परिवार के सदस्यों के बीच बेवजह विवाद और तनाव बढ़ सकते हैं. इसलिए कई लोग शनि वक्री शुरू होने से पहले ही जरूरत का नमक खरीदकर रख लेते हैं.
कार्यों में आती है बाधा
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि वक्री के दौरान काले कपड़े और चमड़े से बनी वस्तुओं की खरीदारी से भी बचना चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं और शनि देव की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता है. काले तिल और साबुत उड़द का उपयोग शनि पूजा में किया जाता है, लेकिन धार्मिक मान्यता के अनुसार शनि वक्री के दौरान इन्हें खरीदना उचित नहीं माना जाता. ऐसा कहा जाता है कि इस अवधि में इन वस्तुओं की खरीदारी करने से नौकरी, व्यापार और कार्यक्षेत्र में रुकावटें आ सकती हैं.
(Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। Haryana E Khabar किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है।)