चंडीगढ़ | हरियाणा में प्रॉपर्टी टैक्स का नया सिस्टम वित्तीय वर्ष 2026- 27 से लागू होने जा रहा है. सरकार ने अब टैक्स की गणना कलेक्टर रेट के आधार पर करने का फैसला लिया है और इसके लिए राज्य के शहरों को 4 अलग- अलग कैटेगरी में बांटा गया है. इस नई व्यवस्था के तहत फ्लोर फैक्टर, प्रॉपर्टी कैटेगरी, रिबेट, अधिकतम टैक्स वृद्धि सीमा, लाल डोरा छूट, किराए की संपत्ति पर अतिरिक्त टैक्स और गलत जानकारी पर जुर्माना जैसे कई नए प्रावधान लागू होंगे.

रिटायर्ड जोनल टैक्स ऑफिसर जसवंत सिंह के मुताबिक जिन लोगों ने वित्त वर्ष 2026- 27 तक का टैक्स पहले ही चुका दिया है, उन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा. नोटिफिकेशन जारी होने के एक महीने तक प्रॉपर्टी मालिक चाहें तो 11.10.2013 वाली पुरानी दरों पर टैक्स जमा कर सकते हैं.
फैक्टर लागू
उसके बाद नई दरें ही लागू होंगी. वित्त वर्ष 2025- 26 तक के बकाया और ब्याज की राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा. फ्लोर फैक्टर के तहत केवल ग्राउंड फ्लोर होने पर यह 1 माना जाएगा जबकि हर अतिरिक्त मंजिल या बेसमेंट पर 0.25 की बढ़ोतरी होगी. आवासीय संपत्तियों के लिए यूसेज फैक्टर प्लॉट के आकार पर निर्भर करेगा, जैसे 50 वर्ग मीटर तक के मकानों पर 0.25 फैक्टर, 100 वर्ग मीटर तक के फ्लैट पर 0.75 फैक्टर लागू होगा.
अलग दरें तय
इसी तरह औद्योगिक प्लॉट, संस्थागत संपत्तियों और पेट्रोल पंप, गॉल्फ कोर्स जैसी विशेष श्रेणियों के लिए भी अलग- अलग दरें तय की गई हैं. किराए पर दी गई संपत्ति के हिस्से पर सामान्य दर से 0.25 गुना अतिरिक्त टैक्स वसूला जाएगा. साथ ही, पुराने और नए टैक्स के बीच अंतर बहुत ज्यादा न हो इसके लिए सरकार ने कैपिंग सीमा भी तय की है, जो संपत्ति के आकार और प्रकार के अनुसार 1.25 गुना से लेकर 3 गुना तक हो सकती है.